ममता को बड़ा झटका! बागी सांसदों ने बदला पाला

तृणमूल कांग्रेस के 19 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का दावा करते हुए एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वहीं टीएमसी ने इस कदम को चुनौती देते हुए लोकसभा स्पीकर से हस्तक्षेप की मांग की है।

ममता को बड़ा झटका! बागी सांसदों ने बदला पाला

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 जून 2026

टीएमसी में बड़ा सियासी संकट

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के 19 बागी सांसदों ने एक अलग गुट बनाकर नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का दावा किया है और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

दिल्ली में हुआ हाई वोल्टेज राजनीतिक घटनाक्रम

रविवार को टीएमसी के कई सांसद दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पहुंचे। यहां करीब दो घंटे तक चली बैठक के बाद सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने पहुंचे। इस दौरान सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तिदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।

एनडीए के साथ जाने का दावा

बागी सांसदों की ओर से दावा किया गया कि उनका समूह अब नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा बन चुका है और आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ मिलकर काम करेगा। सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि उनके साथ मौजूद सांसदों की संख्या टीएमसी के कुल लोकसभा सांसदों की संख्या के दो तिहाई से अधिक है।

असली टीएमसी कौन इसका फैसला अदालत करेगी

वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने दावा किया कि उनका गुट औपचारिक रूप से एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल में विलय कर चुका है। उन्होंने कहा कि अब असली टीएमसी कौन है इसका फैसला न्यायालय में होगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को लिखा पत्र

इस पूरे घटनाक्रम के बीच टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने की मांग की है। अभिषेक ने कहा कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल अपने अधिकृत नेतृत्व और अधिकृत व्हिप के तहत ही कार्य करती है।

दल बदल कानून का भी दिया हवाला

अभिषेक बनर्जी ने पत्र में स्पष्ट किया कि पार्टी दल बदल विरोधी कानून के तहत उपलब्ध सभी संवैधानिक और कानूनी विकल्पों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखती है। उन्होंने आग्रह किया कि टीएमसी के नाम पर किसी अन्य समूह को कोई विशेष सुविधा या मान्यता न दी जाए।

बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव

इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। विपक्षी दल इसे टीएमसी के भीतर असंतोष का बड़ा संकेत बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे पार्टी को कमजोर करने की साजिश करार दे रही है।

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा

इस बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस अगले कुछ समय में और कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और कई नेता नए राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं।

आगे क्या होगा

अब सभी की नजर लोकसभा स्पीकर के अगले कदम और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है। यदि बागी सांसदों के दावों को चुनौती दी जाती है तो मामला अदालत और संसदीय प्रक्रियाओं तक पहुंच सकता है। इस पूरे घटनाक्रम का असर आने वाले समय में पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर देखने को मिल सकता है।