चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी
महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरपुर में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को अत्यंत जघन्य बताते हुए कहा कि यह दुर्लभतम मामलों में से एक है। मामले की सुनवाई तेज गति से पूरी हुई और एक महीने के भीतर फैसला सुनाया गया।
दि राइजिंग न्यूज़ | पुणे | 29 जून 2026
चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में बड़ा फैसला
महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरपुर में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी निर्मम हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को अत्यंत क्रूर और समाज को झकझोर देने वाला बताते हुए कठोरतम दंड देने का निर्णय लिया।विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह ऐसा जघन्य अपराध है जिसमें केवल आजीवन कारावास पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
एक महीने के भीतर पूरी हुई सुनवाई
यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की तेज गति के कारण भी चर्चा में रहा। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।25 जून को अदालत ने भीमराव कांबले को दोषी करार दिया था। इसके बाद 29 जून को सजा पर अंतिम फैसला सुनाया गया। इस तरह लगभग एक महीने के भीतर जांच, सुनवाई और सजा की प्रक्रिया पूरी हो गई।फैसला सुनाए जाने के दौरान पीड़ित बच्ची के परिजन अदालत में मौजूद थे।
अदालत ने अपराध को बताया दुर्लभतम श्रेणी का मामला
सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि मासूम बच्ची के साथ जिस प्रकार की बर्बरता की गई, वह मानवता को शर्मसार करने वाली है।न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस तरह के अपराध समाज की संवेदनाओं को गहरी चोट पहुंचाते हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए।
मई में हुई थी दर्दनाक वारदात
यह घटना 1 मई 2026 को पुणे जिले के भोर तालुका स्थित नसरपुर क्षेत्र में हुई थी।जानकारी के अनुसार चार वर्षीय बच्ची अपने घर के सामने खेल रही थी। इसी दौरान 65 वर्षीय भीमराव कांबले उसे बहला-फुसलाकर पास की एक गौशाला में ले गया।आरोप है कि वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद शव छिपाने की कोशिश
जांच के दौरान सामने आया कि अपराध को छिपाने के उद्देश्य से आरोपी ने बच्ची के सिर पर पत्थर से हमला किया और उसकी मौत के बाद शव को गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया।जब कई घंटों तक बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में गौशाला से उसका शव बरामद हुआ, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।
सीसीटीवी फुटेज बना अहम सबूत
मामले की जांच में आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।फुटेज में आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दिया था। पुलिस ने इसी आधार पर आरोपी को हिरासत में लिया और आगे की जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए।अभियोजन पक्ष ने अदालत में वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ गवाहों के बयान भी पेश किए।
अभियोजन पक्ष ने मांगी थी फांसी
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक ने अदालत से दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।अभियोजन पक्ष का तर्क था कि आरोपी ने एक मासूम बच्ची के साथ अमानवीय अपराध किया है और उसके व्यवहार में किसी प्रकार का पश्चाताप भी दिखाई नहीं दिया।पीड़ित परिवार के वकीलों ने भी शुरुआत से ही फांसी की सजा की मांग की थी।
दोषी के रवैये पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी से उसके कृत्य के बारे में सवाल किए थे।अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने अपने अपराध को लेकर कोई पछतावा नहीं दिखाया। अदालत में उसके रवैये को भी गंभीरता से लिया गया।सरकारी वकील ने कहा कि पूरे मुकदमे के दौरान आरोपी के व्यवहार से यह प्रतीत नहीं हुआ कि उसे अपने किए पर कोई खेद है।
फैसले के बाद न्याय की उम्मीद पूरी
फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया। स्थानीय लोगों ने भी इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में त्वरित जांच और शीघ्र न्याय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।अदालत के इस फैसले के साथ ही नसरपुर की उस दर्दनाक घटना में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।