क्यूआर कोड वाले ईमेल से रहें सावधान, माइक्रोसॉफ्ट ने साइबर ठगी को लेकर जारी किया बड़ा अलर्ट
माइक्रोसॉफ्ट ने क्यूआर कोड वाले फर्जी ईमेल को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। साइबर अपराधी नकली ईमेल और वेबसाइट के जरिए लोगों की निजी जानकारी और पासवर्ड चुरा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार २६ देशों में हजारों लोग इस ठगी का शिकार बन चुके हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को अनजान क्यूआर कोड और संदिग्ध ईमेल से सतर्क रहने की सलाह दी है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 9 मई 2026
साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए अब एक नया और खतरनाक तरीका अपनाना शुरू कर दिया है। क्यूआर कोड वाले फर्जी ईमेल के जरिए लोगों की निजी जानकारी और पासवर्ड चुराए जा रहे हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए माइक्रोसॉफ्ट के साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने वैश्विक चेतावनी जारी की है। इस तरह के साइबर हमलों में हजारों लोग और बड़ी कंपनियां निशाना बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में इस प्रकार के हमले और तेजी से बढ़ सकते हैं, इसलिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
26 देशों में हजारों लोग बने निशाना
माइक्रोसॉफ्ट डिफेंडर से जुड़े शोधकर्ताओं के अनुसार साइबर अपराधियों ने इस तरीके से २६ देशों की लगभग १३ हजार कंपनियों के करीब ३५ हजार उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाया है। इन हमलों का सबसे अधिक असर अमेरिका में देखा गया, लेकिन भारत समेत कई अन्य देशों में भी इस तरह के साइबर हमलों का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के कारण साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
कैसे शुरू होता है यह फर्जीवाड़ा
इस ठगी की शुरुआत एक फर्जी ईमेल से होती है, जो देखने में किसी कंपनी या संस्था का आधिकारिक संदेश लगता है। कई बार यह ईमेल मानव संसाधन विभाग या प्रशासनिक विभाग की ओर से भेजा गया प्रतीत होता है। ईमेल में लोगों को डराने या जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए नीति उल्लंघन, खाते की जांच या जरूरी दस्तावेज देखने जैसी बातें लिखी जाती हैं। इसके साथ एक क्यूआर कोड भी दिया जाता है, जिसे स्कैन करने के लिए कहा जाता है।
क्यूआर कोड स्कैन करते ही शुरू हो जाता है खतरा
जैसे ही कोई व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन करता है, उसे एक फर्जी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है। यह वेबसाइट देखने में बिल्कुल असली लगती है ताकि उपयोगकर्ता को किसी तरह का शक न हो। कई मामलों में आगे बढ़ने के लिए नकली सत्यापन प्रक्रिया भी दिखाई जाती है। यदि उपयोगकर्ता वहां अपनी जानकारी दर्ज कर देता है, तो उसका खाता और निजी जानकारी सीधे साइबर अपराधियों के हाथों में पहुंच जाती है।
माइक्रोसॉफ्ट जैसी वेबसाइट बनाकर की जा रही ठगी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि ठग माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार कर रहे हैं। यह वेबसाइट असली प्रवेश पृष्ठ जैसी दिखाई देती है, जिससे लोग आसानी से भ्रमित हो जाते हैं। जैसे ही उपयोगकर्ता वहां अपना नाम, पासवर्ड या अन्य जानकारी दर्ज करता है, उसकी पूरी जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। इसके बाद बैंकिंग जानकारी, आधिकारिक खाते और निजी दस्तावेज भी खतरे में पड़ सकते हैं।
कंपनियों और कर्मचारियों के लिए बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि यह खतरा केवल सामान्य लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी कंपनियां और उनके कर्मचारी भी निशाने पर हैं। यदि किसी कर्मचारी का आधिकारिक खाता हैक हो जाता है, तो पूरी कंपनी का डाटा खतरे में पड़ सकता है। इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ गोपनीय जानकारी लीक होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रहे साइबर अपराधी
रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराधी लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित करने के लिए सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे ईमेल में ऐसे शब्दों और संदेशों का उपयोग करते हैं जिससे व्यक्ति घबरा जाए और बिना सोचे-समझे क्यूआर कोड स्कैन कर ले। यही जल्दबाजी लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना देती है।
कैसे करें बचाव
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान ईमेल में दिए गए क्यूआर कोड को तुरंत स्कैन नहीं करना चाहिए। यदि किसी ईमेल में खाते की जांच, तुरंत सत्यापन या गोपनीय जानकारी मांगने जैसी बातें हों, तो पहले भेजने वाले की पहचान की पुष्टि करें। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध लिंक और दस्तावेज को खोलने से बचना चाहिए।
कंपनियों को भी सतर्क रहने की जरूरत
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को अपने नेटवर्क सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना चाहिए। कर्मचारियों को समय-समय पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण देना भी जरूरी है। इसके अलावा दोहरी सुरक्षा प्रणाली और नियमित निगरानी जैसे उपाय अपनाकर इस तरह के साइबर हमलों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर क्यूआर कोड आधारित ईमेल ठगी तेजी से बढ़ता साइबर खतरा बन चुकी है। साइबर अपराधी अब पहले से अधिक चालाक और तकनीकी रूप से मजबूत तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में लोगों को डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। छोटी सी लापरवाही निजी जानकारी, बैंक खाते और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खतरे में डाल सकती है।