राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच तेज
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और कथित अनियमितताओं को लेकर एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। दानपेटियों से निकले नोटों की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कई कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया गया है। मामले में एफआईआर दर्ज करने और पॉलीग्राफ जांच की मांग भी उठी है।
दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 17 जून 2026
राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन की जांच में तेजी
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर चल रही जांच अब और तेज हो गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने दानपेटियों से निकली राशि की गिनती और उसके प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अब तक लगभग 43 कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि दानपेटियों से निकाली गई नकदी की गिनती, गड्डियां तैयार करने और उसके रिकॉर्ड प्रबंधन की प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर अनियमितता तो नहीं हुई। एसआईटी पूरी प्रक्रिया की कड़ी से कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है।
एफआईआर और पॉलीग्राफ जांच की मांग
इस बीच अयोध्या निवासी संतोष दुबे ने राम जन्मभूमि कोतवाली में एक तहरीर देकर मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पॉलीग्राफ परीक्षण कराने की भी मांग उठाई है। तहरीर में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित चार लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस और जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
आरोपों को टीनू यादव ने बताया निराधार
चंपत राय के करीबी सहयोगी माने जाने वाले राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत और दुर्भावना से प्रेरित हैं। एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान टीनू यादव ने कहा कि वह वर्ष 1983 से संगठन से जुड़े हुए हैं और उनकी संपत्तियों को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उनकी संपत्ति पर संदेह है तो उसकी स्वतंत्र जांच कराई जा सकती है।
संपत्ति को लेकर दी सफाई
टीनू यादव ने दावा किया कि उनकी संपत्तियां और अन्य संसाधन मंदिर निर्माण कार्य शुरू होने से पहले के हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले से जमीन खरीदी हुई थी और वह लंबे समय से हॉस्टल संचालन जैसे कार्यों से भी जुड़े रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी आय और संपत्ति के सभी स्रोत वैध हैं तथा किसी भी जांच में यह तथ्य स्पष्ट हो जाएगा।
चोरी के आरोपों से किया इनकार
टीनू यादव ने कहा कि राम मंदिर में किसी प्रकार की चोरी नहीं हुई है और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के आरोप लगाए जा रहे हैं और पूरे मामले को अनावश्यक रूप से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने लाना चाहिए ताकि जांच एजेंसियां उसकी सत्यता की जांच कर सकें।
एसआईटी रिपोर्ट का इंतजार
टीनू यादव ने यह भी बताया कि अब तक एसआईटी ने उनसे कोई पूछताछ नहीं की है। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी उन्हें बुलाती है तो वह पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर ट्रस्ट में उनकी भूमिका मुख्य रूप से सेवा कार्यों और व्यवस्थाओं तक सीमित रही है। उनके अनुसार वह सफाई और अन्य प्रबंधन संबंधी कार्यों में सहयोग करते रहे हैं और आज भी नियमित रूप से मंदिर परिसर में आते-जाते हैं।
जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजर
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और संबंधित दस्तावेजों, कर्मचारियों तथा प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चढ़ावे के प्रबंधन में कहीं कोई वित्तीय अनियमितता या प्रक्रियागत चूक हुई है या नहीं। मामले को लेकर अयोध्या सहित पूरे देश की नजर अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।