राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय से 3 घंटे पूछताछ, जांच का दायरा बढ़ा

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने जांच तेज करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। जांच एजेंसियां अब ट्रस्ट के दस्तावेजों, कर्मचारियों की भूमिका और बैंकिंग लेनदेन की भी गहन पड़ताल कर रही हैं।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय से 3 घंटे पूछताछ, जांच का दायरा बढ़ा

दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 1 जुलाई 2026

अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया गया। सूत्रों के अनुसार, उनसे चढ़ावे के रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट के संचालन से जुड़े कई सवाल पूछे गए।

बयान और दस्तावेजों का होगा मिलान

जांच एजेंसियों का कहना है कि चंपत राय के बयान का मिलान अन्य संबंधित लोगों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों से किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए भी बुलाया जा सकता है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावे की कथित चोरी कैसे हुई।

70 लोगों को नोटिस, 140 के बयान होंगे दर्ज

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा, पदाधिकारी गोपाल राव सहित करीब 70 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें ट्रस्ट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच के तहत लगभग 140 लोगों के बयान दर्ज किए जाने की तैयारी है। टीम मंदिर के कर्मचारियों और चढ़ावे की गणना एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर रही है।

पूछताछ में क्या बोले चंपत राय

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान चंपत राय ने किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही संदिग्धों को पकड़वाने और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कराई गई थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चढ़ावे के सुरक्षित प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट की व्यवस्था का हिस्सा थी और किसी प्रकार की अनियमितता रोकना प्रशासनिक जिम्मेदारी के दायरे में आता है।

कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल

जांच अधिकारियों ने कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किए। बताया जा रहा है कि रिश्तेदारों और परिचितों को जिम्मेदारियां सौंपे जाने के आधार के बारे में जानकारी मांगी गई। इस पर कथित तौर पर जवाब दिया गया कि जरूरतमंद लोगों को अवसर देने के उद्देश्य से नियुक्तियां की गई थीं और इस प्रक्रिया में ट्रस्ट के अन्य सदस्य भी शामिल थे।

बैंकिंग लेनदेन तक पहुंची जांच

विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए बैंकिंग लेनदेन की भी पड़ताल शुरू कर दी है। जांच टीम भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या धाम शाखा पहुंची, जहां शाखा प्रबंधक सहित पांच कर्मचारियों से पूछताछ की गई। अधिकारियों ने मंदिर के चढ़ावे से संबंधित राशि जमा करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं।

पांच साल के बैंक रिकॉर्ड खंगाल रही एसआईटी

जांच एजेंसियों ने आरोपियों के बैंक खातों का विवरण और पिछले पांच वर्षों के बैंक स्टेटमेंट भी मांगे हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे की राशि के संग्रहण और बैंक में जमा होने की प्रक्रिया के दौरान कहीं कोई अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी तो नहीं हुई।

वित्तीय कड़ियों की तलाश में जांच एजेंसियां

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब बैंक रिकॉर्ड, ट्रस्ट के आंतरिक दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय लेनदेन से जुड़ी कड़ियों के स्पष्ट होने के बाद मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं से पर्दा उठ सकता है और जांच को नई दिशा मिल सकती है।