विश्व कप में चमके भारतवंशी सरप्रीत सिंह

न्यूजीलैंड के मिडफील्डर सरप्रीत सिंह ने फीफा विश्व कप में इतिहास रचते हुए शुरुआती एकादश में उतरने वाले पहले भारतीय मूल के फुटबॉलर बनने का गौरव हासिल किया। ईरान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने विश्व कप पदार्पण कर नया अध्याय लिखा।

विश्व कप में चमके भारतवंशी सरप्रीत सिंह

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 जून 2026

विश्व कप में भारतवंशी खिलाड़ी का बड़ा कारनामा

फीफा विश्व कप 2026 में न्यूजीलैंड के मिडफील्डर सरप्रीत सिंह ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। वह विश्व कप के किसी मुकाबले में शुरुआती एकादश में जगह बनाने वाले पहले भारतीय मूल के फुटबॉलर बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि को दुनिया भर के भारतीय मूल के लोगों और फुटबॉल प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है।

ईरान के खिलाफ किया विश्व कप पदार्पण

सरप्रीत सिंह ने ईरान के खिलाफ ग्रुप चरण के मुकाबले में विश्व कप पदार्पण किया। न्यूजीलैंड के मुख्य कोच डैरेन बेजले ने उन पर भरोसा जताते हुए शुरुआती टीम में शामिल किया। दस नंबर की जर्सी पहनकर मैदान में उतरे सरप्रीत ने पूरे आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया और लगभग पूरा मैच मैदान पर बिताया।

मैच रहा रोमांचक

न्यूजीलैंड और ईरान के बीच खेला गया मुकाबला 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। सरप्रीत ने मैच के दौरान आक्रामक खेल दिखाते हुए गोल करने के तीन प्रयास किए। हालांकि वह गोल नहीं कर सके, लेकिन उनके प्रदर्शन की सराहना की गई। 90वें मिनट में उन्हें स्थानापन्न खिलाड़ी से बदला गया।

ऑकलैंड से विश्व मंच तक का सफर

27 वर्षीय सरप्रीत सिंह का जन्म न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में पंजाबी मूल के परिवार में हुआ था। बचपन से ही फुटबॉल के प्रति उनका लगाव रहा और उन्होंने धीरे-धीरे न्यूजीलैंड फुटबॉल में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2017 और 2019 फीफा अंडर-20 विश्व कप में भी न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व किया था।

भारतीय मूल के खिलाड़ियों की बढ़ती पहचान

इस विश्व कप में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। सरप्रीत सिंह से पहले ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्ले ने भी भारतीय मूल के खिलाड़ी के रूप में विश्व कप में पदार्पण किया था। हालांकि वह शुरुआती एकादश में शामिल नहीं थे और बतौर स्थानापन्न खिलाड़ी मैदान पर उतरे थे।

इतिहास के पन्नों में दर्ज नाम

विश्व कप इतिहास में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या बेहद सीमित रही है। इससे पहले फ्रांस के विकास दोरासू ने 2006 विश्व कप में हिस्सा लिया था। हालांकि वह किसी मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा नहीं बने थे। ऐसे में सरप्रीत सिंह की उपलब्धि और भी खास बन जाती है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सरप्रीत सिंह की सफलता दुनिया भर में रहने वाले भारतीय मूल के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

भारतीय समुदाय में खुशी

सरप्रीत सिंह की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद भारतीय समुदाय और फुटबॉल प्रशंसकों में उत्साह का माहौल है। विश्व कप जैसे सबसे बड़े मंच पर भारतीय जड़ों से जुड़े खिलाड़ी की सफलता को खेल जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।