नीट पेपर लीक पर अदालत नाराज, जवाबदेही तय करने की मांग

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लग सकती। कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय से हलफनामा मांगा है और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत करने पर जोर दिया है।

नीट पेपर लीक पर अदालत नाराज, जवाबदेही तय करने की मांग

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 30 मई 2026

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल समितियां बनाकर और बैठकें कर लेने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि असली जिम्मेदार लोगों की पहचान और जवाबदेही तय करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद एक बार फिर देश की परीक्षा व्यवस्था और एनटीए की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।


यूपीएससी का उदाहरण देकर एनटीए को घेरा

सुनवाई के दौरान अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कभी पेपर लीक जैसी स्थिति सामने नहीं आई। कोर्ट ने पूछा कि जब सुरक्षा के तमाम इंतजाम मौजूद थे तो फिर नीट का पेपर कैसे लीक हो गया। अदालत ने कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी की आड़ में असली दोषियों को बचाया नहीं जा सकता। जब तक किसी अधिकारी या संस्था की स्पष्ट जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।


एनटीए ने मंत्रालयों पर डाली जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में एनटीए ने कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा पारंपरिक पेन और पेपर (ओएमआर) मोड में इसलिए आयोजित की गई क्योंकि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन की योजना में यही व्यवस्था निर्धारित है। हालांकि अदालत ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठाए।


डॉ. राधाकृष्णन समिति से भी पूछे गए सवाल

सुनवाई के दौरान पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश की गई। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने पूछा कि जब समिति सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रही थी तो फिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। अदालत ने जानना चाहा कि आखिर कौन सी कमी रह गई जिसके कारण पेपर लीक हो गया।


101 सुधार सुझावों की जानकारी

डॉ. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति ने परीक्षा सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कुल 101 सिफारिशें दी हैं। इनमें 60 अल्पकालिक सुझाव शामिल हैं, जिन्हें 2025-26 परीक्षा चक्र में लागू करने की योजना बनाई गई थी। समिति का दावा है कि अधिकांश सुझावों को लागू कर दिया गया है और बाकी पर काम चल रहा है।


पेपर सेटिंग प्रक्रिया में मिली बड़ी खामी

सुनवाई के दौरान डॉ. राधाकृष्णन ने स्वीकार किया कि सबसे बड़ी गड़बड़ी प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में पाई गई थी। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि अब पूरे सिस्टम को मजबूत बना दिया गया है और 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा में ऐसी किसी भी गड़बड़ी की संभावना नहीं रहेगी।


प्रधानमंत्री कर रहे हैं निगरानी

सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा तेजी से की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।


शिक्षा मंत्रालय से मांगा हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने अब शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह परीक्षा सुरक्षा और दीर्घकालिक परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। अदालत ने पूछा है कि भविष्य में सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षाएं कराने के लिए सरकार क्या स्थायी व्यवस्था तैयार कर रही है। नीट पेपर लीक मामला केवल एक परीक्षा की गड़बड़ी नहीं बल्कि देश की पूरी परीक्षा प्रणाली पर लगा बड़ा सवाल है। लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य से जुड़े ऐसे मामलों में छोटी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी यह संकेत देती है कि अब केवल सुधारों के दावे नहीं, बल्कि वास्तविक जवाबदेही तय करनी होगी। आने वाले दिनों में यह मामला शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की वजह बन सकता है।