बहू को पैसा निकालने की मशीन समझना बंद करें: सुप्रीम कोर्ट
दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बहू को पैसा निकालने की मशीन नहीं समझा जा सकता। अदालत ने आरोपी पति और उसके परिवार को राहत देने से इनकार कर दिया और बहू-बेटियों के सम्मान की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 30 मई 2026
दहेज प्रताड़ना और बहू-बेटियों के सम्मान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि शादी के बाद किसी की बेटी और उसके परिवार का अपमान करने का किसी को कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दहेज को लेकर समाज में फैली गलत मानसिकता पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि बहू को पैसा निकालने की मशीन समझना बंद करना होगा। अदालत ने आरोपी पति और उसके परिवार को राहत देने से इनकार करते हुए जेल भेजने का आदेश दिया।
कोर्ट ने पूछा- जिनसे पैसे लेते हो, उन्हें भिखारी कैसे कहते हो
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने आरोपी पक्ष के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जिन लोगों से दहेज या आर्थिक मदद ली जाती है, बाद में उन्हीं का अपमान करना बेहद शर्मनाक है। कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर जिनसे पैसे लेते हो, उन्हें भिखारी कैसे कह सकते हो? यह टिप्पणी अदालत की उस चिंता को दर्शाती है जिसमें शादी के बाद लड़कियों और उनके परिवारों के साथ होने वाले आर्थिक और मानसिक शोषण को गंभीर सामाजिक समस्या माना गया।
दहेज हत्या और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला
यह मामला दहेज हत्या और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ा हुआ था। आरोपी पक्ष अदालत से राहत की उम्मीद कर रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज को गलत संदेश देगा और पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय होगा।
लड़कियों से शादी क्यों करते हैं
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने समाज की सोच पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर शादी के बाद लड़की और उसके परिवार का अपमान ही करना है तो फिर लड़के शादी क्यों करते हैं? अदालत ने माना कि आज भी कई परिवार बहू को सम्मान देने के बजाय आर्थिक लाभ का साधन समझते हैं।
आर्थिक शोषण पर अदालत की चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में शादी के बाद लड़की और उसके माता-पिता को आर्थिक रूप से निचोड़ने की कोशिश की जाती है। अदालत ने इस मानसिकता को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि कानून ऐसे लोगों के खिलाफ पूरी सख्ती से कार्रवाई करेगा। बहू और उसके परिवार को प्रताड़ित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
धारा 498ए पर भी की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल पर केवल भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत मामला दर्ज है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें खुश होना चाहिए कि उन पर सिर्फ यही धारा लगी है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि दहेज प्रताड़ना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
बहू-बेटियों के सम्मान पर सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि देश का कानून बहू-बेटियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अदालत ने कहा कि कोई भी परिवार किसी लड़की को अपने घर लाकर उसका या उसके माता-पिता का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केवल एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। आज भी दहेज और आर्थिक शोषण के कारण हजारों महिलाएं मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलती हैं। अदालत का यह रुख बताता है कि अब बहू-बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून और सख्त होता जा रहा है। समाज को भी यह समझना होगा कि शादी कोई सौदा नहीं बल्कि सम्मान और विश्वास का रिश्ता है।