प्रशासन से टूटी उम्मीद तो मांगी इच्छामृत्यु
गुजरात के सूरत में एक बुजुर्ग दंपति ने प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नेताओं पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। दंपति का कहना है कि वर्षों से चल रहे कानूनी और प्रशासनिक विवादों ने उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | सूरत | 23 जून 2026
कलेक्टर को पत्र लिखकर मांगी इच्छामृत्यु
गुजरात के सूरत शहर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पांडेसरा क्षेत्र में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।दंपति का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं द्वारा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। लगातार संघर्ष और परेशानियों के चलते उन्होंने जीवन समाप्त करने की इच्छा जाहिर की है।
कौन हैं इच्छामृत्यु मांगने वाले दंपति
इच्छामृत्यु की मांग करने वाले दंपति की पहचान 73 वर्षीय श्यामभाई कपूरजी गहलोत और उनकी 68 वर्षीय पत्नी मधुबेन गहलोत के रूप में हुई है।दोनों पांडेसरा स्थित गुजरात हाउसिंग बोर्ड के जालाराम नगर क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है और उन्हें कहीं से न्याय मिलता दिखाई नहीं दे रहा।
2016 के हादसे में उजड़ गया था पूरा परिवार
श्यामभाई गहलोत ने बताया कि वर्ष 2016 में हुए एक भीषण सड़क हादसे में उनके परिवार के 9 सदस्यों की मौत हो गई थी।इस दर्दनाक घटना के बाद उनका पूरा परिवार खत्म हो गया और अब केवल वह तथा उनकी पत्नी ही बचे हैं। दंपति का कहना है कि इस हादसे के बाद उनका जीवन पहले ही गहरे दुख में डूब चुका था, लेकिन बाद की परिस्थितियों ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया।
12 दुकानों को लेकर शुरू हुआ विवाद
दंपति के अनुसार उन्होंने वर्ष 2006 में बमरोली ग्राम पंचायत क्षेत्र में प्लॉट नंबर 95, 96, 107 और 110 पर स्थित कुल 12 छोटी दुकानें खरीदी थीं।वर्ष 2008 में यह क्षेत्र सूरत महानगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में आ गया। दंपति का कहना है कि इसके बाद से वे नियमित रूप से सभी कर और अन्य शुल्क जमा करते रहे।
बिना नोटिस दुकानों को किया गया सील
दंपति का आरोप है कि वर्ष 2021 में उधना जोन के तत्कालीन कार्यकारी इंजीनियर ने बिना किसी पूर्व नोटिस के उनकी सभी 12 दुकानों को सील कर दिया।इस कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामला कई वर्षों तक न्यायालय में चला और दंपति लगातार कानूनी लड़ाई लड़ते रहे।
हाईकोर्ट से मिली राहत
करीब साढ़े पांच वर्ष तक चली कानूनी प्रक्रिया और फायर विभाग की रिपोर्ट के आधार पर 31 जनवरी 2026 को उनकी दुकानों की सील खोल दी गई।दंपति का कहना है कि अदालत से राहत मिलने के बाद उन्हें लगा कि अब उनकी परेशानियां खत्म हो जाएंगी और वे फिर से अपना कारोबार शुरू कर सकेंगे।
फिर से सील कर दी गईं दुकानें
दंपति के अनुसार राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। उनका आरोप है कि 30 मई 2026 को उधना साउथ जोन के वर्तमान कार्यकारी इंजीनियर के आदेश पर उनकी सभी दुकानों को एक बार फिर सील कर दिया गया।उन्होंने दावा किया कि इस बार भी उन्हें कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया और न ही कार्रवाई का कोई स्पष्ट कारण बताया गया।
आर्थिक लेनदेन का दबाव बनाने का आरोप
श्यामभाई और मधुबेन गहलोत ने आरोप लगाया है कि उन पर एक स्थानीय राजनीतिक व्यक्ति से मिलने का दबाव बनाया जा रहा है।उन्होंने यह भी दावा किया कि उनसे आर्थिक लेनदेन की मांग की गई। दंपति का कहना है कि इन परिस्थितियों ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद परेशान कर दिया है।
मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुका है दंपति
दंपति का कहना है कि वर्षों से चल रही कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।उनके अनुसार लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने, मुकदमे लड़ने और अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल रही है। इस कारण वे मानसिक रूप से भी बेहद तनाव में हैं।
अधिकारियों से नहीं हो पा रही मुलाकात
श्यामभाई गहलोत ने आरोप लगाया कि कई बार उन्हें संबंधित अधिकारियों से मिलने तक का अवसर नहीं दिया गया।उन्होंने कहा कि बिना नोटिस कार्रवाई की जाती रही और उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें लगातार परेशान किया गया। इसी वजह से उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।यदि दंपति के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता और नागरिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारियों या सूरत महानगरपालिका की ओर से मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
न्याय की उम्मीद में उठाया अंतिम कदम
दंपति का कहना है कि उन्होंने न्याय पाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है।इसी निराशा में उन्होंने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई और इस मामले की जांच पर टिकी हुई हैं।