बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध

तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के बहादुरगुडा गांव में बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए प्रस्तावित 650 एकड़ भूमि अधिग्रहण का किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि उचित मुआवजा, पुनर्वास और भूमि अधिकारों की लिखित गारंटी मिलने के बाद ही अधिग्रहण किया जाए। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है।

बुलेट ट्रेन के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध

दि राइजिंग न्यूज़ | तेलंगाना | 18 जुलाई 2026

तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के बहादुरगुडा गांव में बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए प्रस्तावित 650 एकड़ भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। किसान बिना लिखित आश्वासन, उचित मुआवजे और पुनर्वास की गारंटी के अपनी जमीन देने से इनकार कर रहे हैं। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है और विपक्षी दल भी किसानों के समर्थन में उतर आए हैं।


बहादुरगुडा में भूमि अधिग्रहण को लेकर बढ़ा तनाव

तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के शमशाबाद मंडल स्थित बहादुरगुडा गांव में पिछले कई दिनों से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। सरकार ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए लगभग 650 एकड़ भूमि की पहचान की है, जिसके अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जैसे ही प्रशासनिक अधिकारियों ने इलाके में बाड़ लगाने का प्रयास किया, बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है और बिना स्पष्ट लिखित भरोसे के वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे।


किसानों ने लगाया भरोसा तोड़ने का आरोप

प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले उन्हें भरोसा दिलाया था कि फिलहाल न तो भूमि अधिग्रहण होगा और न ही किसी प्रकार की बाड़बंदी की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगले ही दिन अधिकारी भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ पहुंच गए तथा बाड़ लगाने का काम शुरू करने का प्रयास किया। इससे किसानों में भारी नाराजगी फैल गई। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई भरोसे को तोड़ने वाली है और इससे ग्रामीणों का प्रशासन पर विश्वास कमजोर हुआ है।


मुआवजा, पुनर्वास और अधिकारों की मांग पर अड़े किसान

किसानों का कहना है कि वे वर्षों से इस भूमि पर खेती कर रहे हैं और कई परिवारों के पास भूमि से जुड़े वैध अधिकार या लंबे समय से उपयोग के दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार परियोजना के लिए भूमि लेना चाहती है तो सबसे पहले उचित मुआवजा, पुनर्वास की स्पष्ट योजना और किसानों के अधिकारों को लिखित रूप में स्वीकार करना होगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा और जब तक सभी शर्तें लिखित रूप में नहीं दी जाएंगी, तब तक वे अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।


पुलिस की कार्रवाई के बाद और बढ़ा विवाद

स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने बाड़ लगाने के काम को रोक रहे कई किसानों और ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। किसानों का आरोप है कि प्रशासन बातचीत करने के बजाय दबाव बनाकर भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और परियोजना से जुड़े कार्यों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।


राजनीतिक दलों की भी हुई एंट्री

भूमि अधिग्रहण का यह मामला अब केवल किसानों तक सीमित नहीं रहा बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। भारत राष्ट्र समिति ने खुलकर किसानों का समर्थन करते हुए कहा है कि उचित प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी भी किसान की भूमि नहीं ली जानी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसानों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि उनकी सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण किया गया तो इसका विरोध और तेज किया जाएगा।


विकास और किसानों के अधिकारों के बीच बढ़ी बहस

बुलेट ट्रेन जैसी बड़ी परियोजनाओं को विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन बहादुरगुडा में चल रहा विरोध यह दिखाता है कि विकास परियोजनाओं के साथ किसानों के अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार समय रहते किसानों से संवाद स्थापित करती है और पारदर्शी तरीके से मुआवजा तथा पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करती है, तो ऐसे विवादों से बचा जा सकता है।


आगे क्या होगा, इस पर सबकी नजर

बहादुरगुडा में किसानों का आंदोलन लगातार पांचवें दिन भी जारी है और फिलहाल कोई समाधान निकलता दिखाई नहीं दे रहा है। प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार क्या फैसला लेती है और यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर पूरे तेलंगाना की नजर बनी हुई है।