वांगचुक को अस्पताल ले गई पुलिस, सिब्बल ने घेरा मोदी सरकार
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने अन्ना आंदोलन का उल्लेख करते हुए सरकार से आंदोलनकारियों और युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने की आवश्यकता बताई।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले इक्कीस दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों का उल्लेख किया और सरकार से आंदोलनकारियों के साथ संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद तेज हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने की आशंका के बीच दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। हालांकि इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए।
कपिल सिब्बल ने अन्ना आंदोलन का हवाला देकर सरकार पर साधा निशाना
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सामाजिक माध्यम पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि वर्तमान घटनाक्रम उन्हें वर्ष २०११ के अन्ना आंदोलन की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ हुए व्यवहार की खुलकर आलोचना की थी। सिब्बल के अनुसार, उस समय मोदी ने कहा था कि यदि वह मुख्यमंत्री नहीं होते तो स्वयं जाकर आंदोलनकारियों से पूछते कि उन्हें रात के समय इस प्रकार हटाया क्यों गया।सिब्बल ने कहा कि आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और अब वही नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उस समय आंदोलनकारियों के अधिकारों की बात की जाती थी, तो आज उसी प्रकार के मामलों में सरकार का दृष्टिकोण अलग क्यों दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त है।
प्रधानमंत्री से संवाद को लेकर पूछे कई अहम सवाल
कपिल सिब्बल ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि सरकार ने आंदोलन कर रहे युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत करने का प्रयास क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब देश का युवा अपने भविष्य, पर्यावरण और विकास जैसे मुद्दों को लेकर चिंता व्यक्त कर रहा है, तब सरकार को उनसे संवाद स्थापित करना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत ही किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान होती है। यदि सरकार आंदोलनकारियों की बात सुनती और उनके साथ चर्चा करती, तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। सिब्बल ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती सरकार और जनता के बीच विश्वास तथा संवाद पर निर्भर करती है।
विपक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर जताई चिंता
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना के बाद कई विपक्षी नेताओं ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की मूल भावना का हिस्सा है और इसे सम्मान मिलना चाहिए। नेताओं का आरोप है कि सरकार बातचीत के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई को प्राथमिकता दे रही है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ सकता है।विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि किसी आंदोलनकारी की तबीयत खराब होती है तो उसका उपचार आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ उनकी मांगों और चिंताओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि संवाद और सहमति के रास्ते से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।
सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक केंद्र सरकार की ओर से कपिल सिब्बल के आरोपों या उनके सवालों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं प्रशासन का कहना है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने का निर्णय पूरी तरह चिकित्सकीय सलाह और स्वास्थ्य संबंधी कारणों के आधार पर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है।हालांकि विपक्ष इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं दिख रहा है और लगातार सरकार से आंदोलनकारियों की मांगों पर बातचीत शुरू करने की मांग कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
देशभर की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर
सोनम वांगचुक के अनशन और उन्हें अस्पताल ले जाने की घटना को लेकर देशभर में लगातार चर्चा हो रही है। सामाजिक संगठनों, विभिन्न राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। यह भी देखा जाएगा कि सरकार आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करती है या नहीं और इस पूरे विवाद का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।फिलहाल इस घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतांत्रिक अधिकारों, शांतिपूर्ण विरोध और सरकार की जवाबदेही को लेकर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।