ट्रंप-नेतन्याहू में मतभेद बढ़े
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा रुख अपनाया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की सैन्य रणनीति पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं के बयानों से पश्चिम एशिया की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | येरूशलम | 17 जून 2026
अमेरिका और ईरान समझौते पर बढ़ा विवाद
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए प्रस्तावित समझौते ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। शुक्रवार को जिनेवा में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, लेकिन इजरायल ने साफ संकेत दिए हैं कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सुरक्षा नीति में कोई नरमी नहीं बरतेगा। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनके देश की प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे अमेरिका और ईरान के बीच कोई भी समझौता हो जाए, इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
ट्रंप और नेतन्याहू की राय में अंतर
नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राय अलग हो सकती है। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझेदार हैं और अक्सर कई मामलों में एकमत रहते हैं, लेकिन कुछ विषय ऐसे भी होते हैं जहां मतभेद सामने आते हैं। उनका कहना था कि इजरायल ने अपने ऊपर मंडरा रहे कई बड़े खतरों को समाप्त किया है, लेकिन क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना इजरायल का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
ईरान और सहयोगी संगठनों पर जारी रहेगा अभियान
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान और उसके समर्थित संगठनों के खिलाफ इजरायल का अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि संयुक्त अमेरिकी और इजरायली प्रयासों ने क्षेत्र में परमाणु खतरे को काफी हद तक कम किया है। लेबनान की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इजरायली सेना रणनीतिक सुरक्षा क्षेत्रों में तब तक बनी रहेगी जब तक सुरक्षा जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाते। उनके अनुसार, इजरायल किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए स्वतंत्र कार्रवाई की नीति जारी रखेगा।
हिज्बुल्लाह को लेकर ट्रंप की टिप्पणी
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की सैन्य रणनीति पर असहमति जताई है। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दिए गए बयान में ट्रंप ने कहा कि हिज्बुल्लाह से निपटने में सीरिया अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है। ट्रंप का मानना है कि लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने ईरान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का खतरा पैदा किया था। उन्होंने चिंता जताई कि सैन्य अभियानों के दौरान आम नागरिकों की भी जान जा रही है।
नागरिकों की मौत पर जताई चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि किसी एक लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए बड़े आवासीय क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करते समय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हाल ही में लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए इजरायली हमले में कई लोगों के हताहत होने की खबरों के बाद ट्रंप की यह टिप्पणी और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रिश्तों में खटास से किया इनकार
हालांकि ट्रंप ने नेतन्याहू की रणनीति पर सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने दोनों नेताओं के बीच संबंध खराब होने की अटकलों को खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि उनके और नेतन्याहू के बीच अच्छे संबंध हैं और दोनों देश सुरक्षा तथा रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग जारी रखेंगे।
शांति समझौते पर टिकी निगाहें
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सामान्य रूप से संचालित करने तथा ईरान पर लगाए गए कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत देने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। यदि यह समझौता सफल रहता है तो पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है। हालांकि इजरायल के सख्त रुख और अमेरिका-इजरायल के बीच उभरते मतभेद आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति को और जटिल बना सकते हैं।