ईरान-अमेरिका डील पर पाकिस्तान का दावा

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करते हुए इसका श्रेय लेने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने समझौते को "इस्लामाबाद समझौता" बताते हुए अपनी भूमिका का दावा किया, साथ ही डोनाल्ड ट्रंप, ईरानी नेतृत्व और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की प्रशंसा की। इस घटनाक्रम को पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीतिक छवि मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान-अमेरिका डील पर पाकिस्तान का दावा

दि राइजिंग न्यूज़ | इस्लामाबाद | 18 जून 2026


अमेरिका-ईरान समझौते के बाद पाकिस्तान ने ठोकी मध्यस्थता की दावेदारी

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच हुए शांति समझौते के बाद पाकिस्तान ने इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय लेने की कोशिश शुरू कर दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते में उनकी मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समझौते के बाद जारी अपने बयान में उन्होंने इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर किए गए समझौते को उन्होंने एक मध्यस्थ के रूप में अपनी स्वीकृति प्रदान की है। उनके अनुसार यह समझौता इस बात का प्रमाण है कि दोनों देश बातचीत के माध्यम से विवादों का समाधान चाहते हैं और युद्ध के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने के पक्षधर हैं।


इस्लामाबाद समझौता बताकर पाकिस्तान ने बढ़ाई अपनी अहमियत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस समझौते को "इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन" का नाम देते हुए दावा किया कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा। उन्होंने कहा कि समझौते के पहले चरण के तहत ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू करेगा, जबकि अमेरिका समुद्री प्रतिबंधों में राहत देगा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समझौते के बहाने वैश्विक मंच पर अपनी छवि मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। हाल के वर्षों में आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह अवसर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक उपयोगिता दिखाने का माध्यम बन सकता है।


ट्रंप की जमकर तारीफ, बातचीत की नीति को बताया सफलता की कुंजी

शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी बातचीत आधारित नीति और शांतिपूर्ण समाधान की प्रतिबद्धता ने एक संभावित बड़े संकट को टाल दिया। उन्होंने कहा कि यदि यह विवाद और आगे बढ़ता तो पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती थी।पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अमेरिकी वार्ता दल की भी सराहना की और कहा कि लगातार संवाद, धैर्य और कूटनीतिक प्रयासों की वजह से दोनों देशों के बीच सहमति बन सकी। उन्होंने इसे विश्व शांति के लिए सकारात्मक संकेत बताया।


ईरान के नेतृत्व को भी दिया शांति का श्रेय

अपने संदेश में शहबाज शरीफ ने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत और समझौते का मार्ग चुना, जिससे क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है।उन्होंने ईरान की वार्ता टीम के धैर्य और कूटनीतिक प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया। पाकिस्तान का कहना है कि दोनों पक्षों की सकारात्मक सोच और समझदारी ने इस समझौते को संभव बनाया है, जो भविष्य में क्षेत्रीय सहयोग का नया अध्याय खोल सकता है।


आसिम मुनीर को बताया समझौते का सबसे बड़ा सूत्रधार

शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इस समझौते को सफल बनाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने दावा किया कि आसिम मुनीर ने पर्दे के पीछे रहकर कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास किए, जिनसे अमेरिका और ईरान के बीच संवाद का रास्ता खुला।इसके साथ ही उन्होंने कतर, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के नेतृत्व का भी धन्यवाद किया। पाकिस्तान का कहना है कि इन देशों के सहयोग और समर्थन के बिना इतनी बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल करना संभव नहीं था।


क्षेत्रीय राजनीति में नया संदेश देने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसे समय में जब देश आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, यह समझौता उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करने का एक प्रयास माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी यह चर्चा जारी है कि इस समझौते में पाकिस्तान की वास्तविक भूमिका कितनी थी, लेकिन शहबाज शरीफ और उनकी सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस दावे पर वैश्विक प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जाएगी।