ईरान दे रहा सस्ता तेल, फिर भी भारत क्यों सतर्क

अमेरिका द्वारा अस्थायी प्रतिबंध राहत दिए जाने के बाद ईरान ने भारत समेत कई देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचने की पेशकश की है। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार भारत फिलहाल बड़े पैमाने पर अतिरिक्त ईरानी तेल खरीदने के मूड में नहीं है, क्योंकि भारतीय रिफाइनरियां पहले से ही लंबी अवधि के आपूर्ति अनुबंधों और भंडारण व्यवस्थाओं से जुड़ी हुई हैं।

ईरान दे रहा सस्ता तेल, फिर भी भारत क्यों सतर्क

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 जून 2026

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी आने तथा प्रतिबंधों में अस्थायी राहत मिलने के बाद वैश्विक तेल बाजार में नई हलचल देखने को मिल रही है। ईरान ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचने की पेशकश की है। इसके बावजूद रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारत फिलहाल बड़े पैमाने पर अतिरिक्त ईरानी तेल खरीदने की संभावना से दूर दिखाई दे रहा है।ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी और कई अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक कंपनियां भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क कर रही हैं। उनका उद्देश्य भारतीय खरीदारों को कम कीमत पर ईरानी कच्चा तेल उपलब्ध कराना है। हालांकि भारतीय ऊर्जा कंपनियां फिलहाल अपने मौजूदा अनुबंधों और आपूर्ति योजनाओं को प्राथमिकता दे रही हैं।

प्रतिबंधों में राहत के बाद बढ़ी गतिविधियां

हाल के घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में सीमित अवधि के लिए राहत दी है। इसके बाद ईरानी तेल दोबारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध होने लगा है।इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री गतिविधियां भी सामान्य होती दिखाई दे रही हैं। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। मार्ग खुलने के बाद तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ी है और वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर भरोसा मजबूत हुआ है।

भारतीय रिफाइनरियों को मिला ऑफर

रिपोर्टों के अनुसार ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी ने भारतीय रिफाइनरियों को सीधे संपर्क कर कच्चा तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया है। कुछ प्रस्ताव बिचौलियों और व्यापारिक कंपनियों के माध्यम से भी भेजे गए हैं।सूत्रों का कहना है कि ईरान ने भारतीय खरीदारों को भरोसा दिलाया है कि उसका कच्चा तेल समान गुणवत्ता वाले क्षेत्रीय तेल की तुलना में प्रति बैरल तीन से चार डॉलर तक सस्ता उपलब्ध कराया जा सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा बाजार में इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सिंगापुर और दुबई से भी आ रहे प्रस्ताव

बताया जा रहा है कि सिंगापुर और दुबई स्थित कई छोटी और मध्यम स्तर की व्यापारिक कंपनियां भी भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क कर रही हैं। इन कंपनियों का दावा है कि उन्हें ईरानी तेल आवंटित किया गया है और वे इसे प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध करा सकती हैं।हाल ही में नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी आपूर्ति के मुद्दे पर भी चर्चा हुई है। ऊर्जा सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

भारत क्यों नहीं बढ़ा रहा तत्काल खरीदारी

भारत की अधिकांश रिफाइनरियां पहले से ही अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप आपूर्ति अनुबंध कर चुकी हैं। अगस्त तक के लिए कई कंपनियों ने तेल की खरीद सुनिश्चित कर रखी है।इसके अलावा भारत विभिन्न देशों से तेल आयात करता है, जिससे आपूर्ति स्रोतों में विविधता बनी रहती है। ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह रणनीति महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में केवल सस्ती कीमतों के आधार पर अचानक बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।

सीमित भंडारण क्षमता भी एक कारण

रिपोर्टों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों के पास अतिरिक्त कच्चा तेल संग्रहित करने की क्षमता भी सीमित है। कई कंपनियां पहले से खरीदे गए तेल के भंडारण और प्रसंस्करण में व्यस्त हैं।ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में मांग बढ़ती है या मौजूदा अनुबंध समाप्त होते हैं, तब भारत ईरानी तेल खरीद पर अधिक गंभीरता से विचार कर सकता है। फिलहाल तत्काल अतिरिक्त खरीदारी की संभावना कम दिखाई दे रही है।

एलपीजी आयात बढ़ने की संभावना

हालांकि कच्चे तेल के मामले में भारत सतर्क रुख अपना रहा है, लेकिन एलपीजी के क्षेत्र में आयात बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। भारत पहले भी व्यापारिक कंपनियों के माध्यम से ईरानी एलपीजी खरीदता रहा है।प्रतिबंधों में राहत मिलने के बाद इस व्यापार में और वृद्धि हो सकती है, जिससे घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

पहले भी खरीद चुका है ईरानी तेल

इससे पहले भी प्रतिबंधों में अस्थायी राहत मिलने पर भारत ने ईरानी तेल की खेपें खरीदी थीं। ऊर्जा क्षेत्र के सूत्रों के अनुसार उस समय कुछ भुगतान वैकल्पिक मुद्रा व्यवस्थाओं के माध्यम से किए गए थे।भारत हमेशा अपने ऊर्जा हितों, वैश्विक परिस्थितियों और कूटनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। इसलिए सस्ता तेल उपलब्ध होने के बावजूद अंतिम फैसला केवल कीमत पर निर्भर नहीं करता।

ऊर्जा सुरक्षा बनी प्राथमिकता

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और उसकी ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकार और रिफाइनरियां दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा, भंडारण क्षमता, कूटनीतिक संबंधों और बाजार स्थिरता जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार करती हैं।फिलहाल ईरान के प्रस्तावों पर नजर रखी जा रही है, लेकिन भारतीय कंपनियां अपने मौजूदा अनुबंधों और दीर्घकालिक ऊर्जा योजनाओं के अनुरूप ही आगे बढ़ने की तैयारी में हैं।