राम मंदिर चढ़ावा चोरी से डगमगाया भरोसा

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के खुलासे ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भरोसे को झटका दिया है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में चढ़ावा गिनने से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है और लाखों रुपये की बरामदगी का दावा किया गया है। मामले ने मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी से डगमगाया भरोसा

दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 28 जून 2026

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण ने करोड़ों श्रद्धालुओं के दशकों पुराने सपने को साकार किया था। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ देशभर में उत्सव का माहौल था और लाखों लोगों की आंखें भावुक हो उठी थीं। लेकिन अब मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने श्रद्धालुओं के भरोसे को गहरा झटका दिया है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

एसआईटी जांच में सामने आए गंभीर आरोप

26 जून को प्रस्तुत की गई एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े लोगों द्वारा कथित अनियमितताएं की गईं। जांच में बताया गया कि लगभग 45 दिनों के भीतर चढ़ावे से जुड़े 70 मामलों के प्रमाण सीसीटीवी फुटेज में दर्ज हुए।पुलिस ने इस मामले में चढ़ावा गिनने के कार्य से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान लगभग 79 लाख रुपये की बरामदगी भी की गई है। आरोप है कि जिन लोगों को श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा और बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वही कथित तौर पर इस अनियमितता में शामिल पाए गए।

श्रद्धालुओं के विश्वास को लगा झटका

राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है। देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालु श्रद्धा भाव से मंदिर में दान करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी की खबर ने लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया है।अयोध्या आने वाले कई श्रद्धालुओं का कहना है कि उनकी श्रद्धा भगवान राम में पहले की तरह अटूट है, लेकिन दान व्यवस्था को लेकर मन में सवाल जरूर पैदा हुए हैं। कुछ श्रद्धालु दानपात्र में धन डालने से पहले पारदर्शिता की मांग भी कर रहे हैं।

मंदिर निर्माण में जनता ने दिया था खुलकर सहयोग

राम मंदिर निर्माण के दौरान ट्रस्ट ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि मंदिर निर्माण में सरकारी धन का उपयोग नहीं किया जाएगा और यह पूरी तरह श्रद्धालुओं के सहयोग से बनाया जाएगा। इसके बाद देशभर में व्यापक चंदा अभियान चलाया गया था।गांवों, कस्बों और शहरों में लाखों लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया। किसी ने कुछ रुपये दान किए तो किसी ने लाखों रुपये की सहायता दी। इसी जनसहयोग के आधार पर भव्य मंदिर का निर्माण संभव हुआ।

मंदिर बनने के बाद बढ़ा चढ़ावा

रामलला के टेंट में विराजमान रहने के समय भी श्रद्धालु लगातार दान करते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार उस समय प्रतिदिन हजारों रुपये का चढ़ावा आता था। लेकिन भव्य मंदिर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई और दान की राशि भी कई गुना बढ़ गई।मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन लाखों रुपये नकद चढ़ावे के रूप में प्राप्त होते हैं। इसके अलावा चेक, ऑनलाइन भुगतान और अन्य माध्यमों से मिलने वाला दान अलग है। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

ट्रस्ट पर उठे सवाल

चढ़ावा चोरी के मामले ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर बहस छेड़ दी है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ट्रस्ट के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।हालांकि संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है, लेकिन जांच पूरी होने तक कई प्रश्न अनुत्तरित बने हुए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

पारदर्शिता की मांग तेज

धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ-साथ श्रद्धालु भी अब चढ़ावे और दान की व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर में आने वाला प्रत्येक रुपया श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है और उसका पूर्ण हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। इस तरह के मामलों में तकनीकी निगरानी, स्वतंत्र ऑडिट और नियमित समीक्षा जैसी व्यवस्थाएं भरोसा मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं और आम जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां किन निष्कर्षों पर पहुंचती हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में इस मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना न केवल प्रशासन बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।