ईरानी पूर्व कमांडर का दावा – "हमारे न्यूक्लियर ठिकाने नहीं तबाह हुए"
दि राइजिंग न्यूज। तेहरान/जेरुसलम/वॉशिंगटन। 20 जून, 2025 । ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई का बड़ा दावा सामने आया है। उन्होंने कहा है कि इजरायल द्वारा हाल ही में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर किए गए हमले नुकसानदायक नहीं रहे, क्योंकि ईरान ने मार्च 2024 में ही युद्ध की आशंका को भांपते हुए संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया था।
दि राइजिंग न्यूज। तेहरान/जेरुसलम/वॉशिंगटन। 20 जून, 2025 ।
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई का बड़ा दावा सामने आया है। उन्होंने कहा है कि इजरायल द्वारा हाल ही में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर किए गए हमले नुकसानदायक नहीं रहे, क्योंकि ईरान ने मार्च 2024 में ही युद्ध की आशंका को भांपते हुए संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया था।
क्या कहा मोहसिन रेजाई ने?
पूर्व कमांडर रेजाई, जो कि ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य भी हैं, ने एक इंटरव्यू में कहा:
“इजरायल समझ रहा है कि हमारी न्यूक्लियर साइट्स तबाह हो गई हैं, लेकिन हम मार्च में ही जान गए थे कि युद्ध होगा। हमने नतांज, इस्फहान, खानदाब और अराक से परमाणु सामग्री हटा दी थी।”
उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल के हमले के बावजूद ईरान के पास मौजूद हथियार-ग्रेड यूरेनियम (90% शुद्धता वाला) अब भी सुरक्षित है और देश की सैन्य क्षमता का केवल 30% ही प्रयोग किया गया है।
क्यों बढ़ी अमेरिका और इजरायल की चिंता?
रेजाई का यह बयान उस समय आया है जब:
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इजरायल ने अप्रैल और मई 2024 के दौरान ईरान की कई प्रमुख न्यूक्लियर साइट्स पर हवाई हमले किए,
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अमेरिका और IAEA ने दावा किया था कि ईरान की परमाणु गतिविधियां बाधित हो गई हैं,
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और अब ईरान यह साफ कर रहा है कि उसका संवर्धित यूरेनियम अभी भी पूरी तरह सुरक्षित है।
इस खुलासे ने वॉशिंगटन और तेल अवीव में रणनीतिक असमंजस और खुफिया नाकामी को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
क्या होता है संवर्धित यूरेनियम और इसका महत्व क्या है?
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प्राकृतिक यूरेनियम में U-235 की मात्रा सिर्फ 0.7% होती है।
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परमाणु बम के लिए 90% या अधिक शुद्धता वाला यूरेनियम चाहिए, जिसे हथियार-ग्रेड यूरेनियम कहा जाता है।
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इसके लिए यूरेनियम को Enrichment (संवर्धन) प्रक्रिया से गुज़ारना पड़ता है।
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यही यूरेनियम परमाणु विस्फोट का मूल स्रोत होता है।
रेजाई के मुताबिक, इसी यूरेनियम को हमलों से पहले ही "डिस्पर्स" कर दिया गया था, यानी सुरक्षित जगहों पर बांट कर छिपा दिया गया।
रेजाई का एक और बड़ा दावा – पाकिस्तान पर भी घसीटा
मोहसिन रेजाई पहले भी एक विवादित बयान दे चुके हैं।
उन्होंने कहा था कि अगर इजरायल ने ईरान पर परमाणु हमला किया, तो पाकिस्तान ने भी इजरायल पर न्यूक्लियर हमला करने का भरोसा दिया है।
हालांकि, पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार ने इस दावे को संसद में खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा कोई समझौता न तो हुआ है, और न ही संभव है।
नतांज और इस्फ़हान – हमले के मुख्य निशाने
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नतांज में ईरान की सबसे प्रमुख यूरेनियम संवर्धन सुविधा है।
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रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल के ड्रोन हमले में यहां सिस्टम को अस्थायी रूप से नुकसान हुआ।
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इस्फ़हान और अराक जैसी साइट्स पर भी हमला हुआ, लेकिन वे कम क्षतिग्रस्त हुईं।
हालांकि, इन हमलों के बावजूद ईरान का दावा है कि उसका न्यूक्लियर कार्यक्रम पहले जैसा ही सक्षम और प्रभावी बना हुआ है।
अब आगे क्या?
रेजाई ने कहा कि अगर अब युद्ध विराम लागू होता है तो इजरायल फिर से सक्रिय हो जाएगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि युद्ध को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, लेकिन दुश्मन को मौका न दिया जाए।
यह बयान साफ संकेत देता है कि ईरान की रणनीति अभी भी सघन, गुप्त और जवाबी हमलों की ओर केंद्रित है।
निष्कर्ष
ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को लेकर इजरायल और अमेरिका की रणनीति पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या वाकई ईरान हमलों से पहले ही तैयार था?
या यह महज मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है?
जो भी हो, रेजाई के इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र में एक नई चिंता की लहर जरूर पैदा कर दी है।