"युद्ध ईरान-इज़राइल में... लेकिन दर्द पाकिस्तान झेल रहा!"
दि राइजिंग न्यूज। इस्लामाबाद। 01 जुलाई 2025 । ईरान और इज़राइल के बीच हालिया संघर्ष ने पूरे विश्व में कच्चे तेल की कीमतों को झटका दे दिया। अब इसका सबसे तेज़ असर पाकिस्तान की जनता पर देखने को मिल रहा है। वहां पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी इज़ाफा हुआ है, जिससे आवाम की कमर टूटती नज़र आ रही है।
दि राइजिंग न्यूज। इस्लामाबाद। 01 जुलाई 2025 ।
ईरान और इज़राइल के बीच हालिया संघर्ष ने पूरे विश्व में कच्चे तेल की कीमतों को झटका दे दिया। अब इसका सबसे तेज़ असर पाकिस्तान की जनता पर देखने को मिल रहा है। वहां पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी इज़ाफा हुआ है, जिससे आवाम की कमर टूटती नज़र आ रही है।
तेल कीमतों में तेज़ उछाल:
| उत्पाद | पहले की कीमत (PKR/L) | नई कीमत (PKR/L) | वृद्धि |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹258.43 | ₹266.79 | ₹8.36 |
| हाई-स्पीड डीज़ल (HSD) | ₹262.59 | ₹272.98 | ₹10.39 |
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यह वृद्धि 1 जुलाई 2025 से प्रभाव में आ चुकी है और 15 जुलाई तक लागू रहेगी।
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पेट्रोल का इस्तेमाल आमतौर पर दोपहिया, रिक्शा और कारों में होता है, जिससे निम्न और मध्यम वर्ग सीधा प्रभावित हो रहा है।
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HSD यानी हाई स्पीड डीज़ल का उपयोग बस, ट्रक, ट्रैक्टर, ट्यूबवेल जैसे भारी वाहन और कृषि उपकरणों में होता है, जिसका असर परिवहन लागत और खाद्य सामग्री पर पड़ता है।
टैक्स और लेवी से भी राहत नहीं:
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पेट्रोल और डीज़ल पर सरकार 100 PKR प्रति लीटर टैक्स वसूल रही है।
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अब इसमें 2.5 PKR/लीटर की अतिरिक्त पेट्रोलियम लेवी जोड़ दी गई है।
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इसके अलावा:
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19 PKR/लीटर कस्टम ड्यूटी
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17 PKR/लीटर वितरण व डीलर मार्जिन
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हालांकि GST (जनरल सेल्स टैक्स) फिलहाल 0% है।
ईरान-इज़राइल युद्ध का प्रभाव:
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12 दिन चले युद्ध में कच्चे तेल की कीमतें 81 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गई थीं।
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युद्ध के दौरान ओमान की खाड़ी और तेल टैंकर रूट्स में खतरे के कारण सप्लाई चेन बाधित हुई।
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नतीजा: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल, और इसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश पर।

जनता की हालत बदतर:
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ट्रांसपोर्ट महंगा, सब्जियां-माल महंगे,
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मिडिल क्लास की जेब पर डकैती,
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सरकार IMF की शर्तें भी निभा रही, जिससे राहत का कोई स्कोप नहीं।