अप्रैल में थोक महंगाई का महाविस्फोट, 42 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई, पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाई चिंता

अप्रैल 2026 में देश की थोक महंगाई दर बढ़कर 8.30 प्रतिशत पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में आम जनता पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

अप्रैल में थोक महंगाई का महाविस्फोट, 42 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई, पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाई चिंता

दि राइजिंग न्यूज डेस्क |  14 मई 2026

देश में महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 8.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले 42 महीनों यानी करीब साढ़े तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। मार्च 2026 में यह आंकड़ा 3.88 प्रतिशत था, लेकिन एक महीने के भीतर इसमें भारी उछाल दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी ने महंगाई को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर दिखाई दे सकता है।

ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र बना महंगाई का सबसे बड़ा कारण

अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा असर ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में देखने को मिला। इस क्षेत्र की महंगाई मार्च के 1.05 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 24.71 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिसने पूरे आर्थिक ढांचे को हिला दिया। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण परिवहन और उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है। बिजली उत्पादन और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमतें बढ़ने से कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। यही कारण है कि अब इसका असर बाजार में मिलने वाले लगभग हर सामान पर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने बढ़ाई आम आदमी की मुश्किलें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पेट्रोल की थोक कीमतों में 32.40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि डीजल की कीमतें 25.19 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। ईंधन महंगा होने का सीधा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ता है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों का खर्च बढ़ने से कंपनियां यह बोझ उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर देती हैं। इसका असर सब्जियों, अनाज, दूध और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी देखने को मिलता है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

रसोई गैस महंगी होने से घरेलू बजट बिगड़ने का खतरा

रसोई गैस की कीमतों में अप्रैल के दौरान 10.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गैस सिलेंडर महंगा होने से सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ता है, क्योंकि घरेलू खर्च पहले से ही बढ़ा हुआ है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच रसोई का बजट संभालना लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। कई परिवारों को अब अपने मासिक खर्चों में कटौती करने की मजबूरी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऊर्जा संकट जारी रहा तो आने वाले महीनों में गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है।

कच्चे तेल में उछाल ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ा है। अप्रैल में कच्चे तेल की थोक महंगाई 88 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई, जो बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बदलाव का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।

प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी

प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई मार्च के 6.36 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 9.17 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें कृषि उत्पाद, खनिज और अन्य जरूरी कच्चा माल शामिल होता है, जिनका उपयोग उद्योगों और बाजारों में बड़े स्तर पर किया जाता है। इन वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत में तेजी आती है और कंपनियां अपने उत्पाद महंगे करने लगती हैं। इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को और ज्यादा महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।

विनिर्मित उत्पादों की महंगाई ने बढ़ाई उद्योगों की चिंता

विनिर्मित उत्पादों की महंगाई मार्च के 3.39 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.62 प्रतिशत पहुंच गई है। इसका मतलब है कि कारखानों में बनने वाले सामान की लागत तेजी से बढ़ रही है। उद्योगों को कच्चे माल, बिजली और परिवहन पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन महंगा हो गया है। कंपनियां अब इस अतिरिक्त बोझ को बाजार में सामान की कीमतें बढ़ाकर पूरा करने की कोशिश कर सकती हैं। इसका असर घरेलू उपयोग की वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक सामान और निर्माण सामग्री तक पर पड़ सकता है।

आम जनता पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव

थोक महंगाई में बढ़ोतरी का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देता है, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खाने-पीने की चीजें, कपड़े, दवाइयां और घरेलू सामान पहले से ज्यादा महंगे हो सकते हैं। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है, क्योंकि उनकी आय सीमित होती है। बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की बचत पर भी असर पड़ सकता है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो लोगों की खरीद क्षमता कमजोर हो सकती है।

खाने-पीने की चीजों में मिली थोड़ी राहत

हालांकि राहत की बात यह रही कि खाद्य महंगाई में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। मार्च में खाद्य महंगाई 1.85 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में बढ़कर 2.31 प्रतिशत दर्ज की गई। प्याज और आलू जैसी जरूरी सब्जियों की कीमतें अभी भी पिछले साल की तुलना में कम बनी हुई हैं। इससे आम लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि परिवहन लागत बढ़ने से आगे चलकर खाद्य वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। यदि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो खाने-पीने की चीजों पर भी इसका असर दिखाई देगा।

अगले महंगाई आंकड़ों पर टिकी देश की नजर

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अनुसार मई 2026 के थोक महंगाई आंकड़े 15 जून 2026 को जारी किए जाएंगे। अब बाजार, उद्योग और आम जनता की नजर अगले आंकड़ों पर टिकी हुई है। यदि महंगाई में इसी तरह तेजी बनी रही तो सरकार और केंद्रीय बैंक पर दबाव बढ़ सकता है। ब्याज दरों में बदलाव और आर्थिक नीतियों में सख्ती जैसे कदम भी देखने को मिल सकते हैं। आने वाले कुछ महीने देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।