बाराबंकी में महिला सिपाही विमलेश पाल हत्याकांड: पुलिस की चूक से आरोपी पति को मिली जमानत, परिवार में दहशत

बाराबंकी के बहुचर्चित महिला सिपाही विमलेश पाल हत्याकांड में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में तकनीकी चूक और दस्तावेजी विरोधाभास के कारण आरोपी पति इंद्रेश मौर्य को मात्र नौ महीने में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। इससे मृतका का परिवार गहरे सदमे और दहशत में है।

बाराबंकी में महिला सिपाही विमलेश पाल हत्याकांड: पुलिस की चूक से आरोपी पति को मिली जमानत, परिवार में दहशत

दि राइजिंग न्यूज़ | बाराबंकी। | 3 जून 2026

 उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। बाराबंकी जिले के बहुचर्चित महिला सिपाही विमलेश पाल हत्याकांड में स्थानीय पुलिस की रीढ़विहीन जांच और लचर पैरवी के कारण मुख्य आरोपी पति को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बेहद आसानी से जमानत मिल गई है। खाकी वर्दीधारियों की इस अक्षम्य और संदेहास्पद चूक के कारण एक मासूम मृतका का पूरा परिवार अब खौफ और दहशत के साए में जीने को मजबूर हो गया है, जिससे इस तथाकथित सुशासन की पोल पूरी तरह से खुल चुकी है।

 पुलिस की तकनीकी चूक ने हत्यारे को दिया जीवनदान

इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश पुलिस की विवेचना प्रणाली और उसकी नीयत पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्याकांड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक महिला सिपाही विमलेश पाल की निर्मम हत्या छब्बीस से सत्ताइस जुलाई के बीच ही हो चुकी थी। परंतु, इसके विपरीत सुबेहा थाने के सरकारी रिकॉर्ड और जनरल डायरी में मृतका की हाजिरी सत्ताइस से उनतीस जुलाई तक बकायदा ऑन-ड्यूटी दर्ज की गई थी। पुलिस विभाग के इसी काले कारनामे और जांच के इतने बड़े विरोधाभास को मुख्य आधार बनाकर हत्यारे सिपाही ने माननीय उच्च न्यायालय को गुमराह किया और मात्र नौ महीने के भीतर ही जमानत की डोरी हासिल कर ली। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि जब विमलेश पाल की सांसें थम चुकी थीं, तो थाने की सरकारी डायरी में उसके फर्जी हस्ताक्षर कौन कर रहा था और किसे बचाने के लिए यह घिनौना खेल खेला गया?

न्याय के लिए भटकता परिवार: अपर पुलिस अधीक्षक से लगाई गुहार

न्याय प्रणाली और पुलिसिया तंत्र से पूरी तरह हताश और निराश होकर मृतका के परिजन बुधवार को बाराबंकी मुख्यालय पहुंचे। पीड़ित परिवार ने अपर पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी से मुलाकात की और अपनी सुरक्षा के साथ-साथ मामले की पुनर्जजांच कराने के लिए न्याय की गुहार लगाई। पुलिस के आला अधिकारियों ने हमेशा की तरह इस बार भी परिवार को केवल खोखला आश्वासन ही थमाया है।सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर बेदम हो चुके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस व्यवस्था से पूरी तरह टूट चुके हैं। मुख्य आरोपी के जेल की सलाखों से बाहर आने के बाद से ही पूरे पीड़ित परिवार को अपनी जान-माल का भारी खतरा सता रहा है, क्योंकि प्रशासन उन्हें सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम सिद्ध हुआ है।

'हमें फांसी की सजा चाहिए': मां और बहन की दर्दनाक आपबीती

अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर आकर मृतका की छोटी बहन पूजा पाल अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई और रोते हुए कहा कि व्यवस्था ने उनके साथ बहुत बड़ा छल किया है। पीड़िता ने चीख-चीखकर कहा कि हत्यारे को सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि उसने एक बेटी को नहीं बल्कि पूरे परिवार को मारा है।वहीं दूसरी ओर, मृतका की वृद्ध मां अनारा देवी ने थरथराते हुए शब्दों में अपनी दहशत जाहिर की कि हत्यारे के बाहर आते ही उनका पूरा कुनबा अब असुरक्षित हो गया है। मृतका के जीजा दिलीप पाल ने इस लचर पैरवी को पुलिस की जानबूझकर की गई साजिश करार दिया है और अब वे इस बहरे तंत्र के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत यानी उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की विवश तैयारी कर रहे हैं।

 प्रेम विवाह से लेकर हाईवे की झाड़ियों तक का सफर

सुलतानपुर जिले की मूल निवासी और वर्ष दो हजार सत्रह बैच की जांबाज महिला सिपाही विमलेश पाल बाराबंकी के सुबेहा थाने में पूरी निष्ठा के साथ तैनात थीं। जुलाई दो हजार पच्चीस में सावन मेले की आधिकारिक ड्यूटी का बहाना बनाकर उन्हें रास्ते से हटा दिया गया और वे अचानक संदेहास्पद परिस्थितियों में लापता हो गईं। इसके बाद तीस जुलाई दो हजार पच्चीस को मसौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिंदौरा गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे झाड़ियों से उनका बेहद क्षत-विक्षत और सड़ चुका शव बरामद हुआ था। विमलेश ने अपने ही विभाग के साथी सिपाही इंद्रेश मौर्य, जो गोंडा का निवासी है, के साथ प्रेम विवाह किया था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच भारी विवाद और प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया था। पुलिस ने शुरुआती जन आक्रोश को दबाने के लिए पति इंद्रेश को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया, लेकिन अब अपनी ही लचर जांच से उसे वापस खुला छोड़ दिया है, जिससे उत्तर प्रदेश पुलिस की विश्वसनीयता पूरी तरह से मटियामेट हो चुकी है।