नीट परीक्षा में बड़ा खुलासा, कथित प्रश्नपत्र के एक सौ चालीस सवाल असली परीक्षा से मिले
नीट स्नातक परीक्षा दो हजार छब्बीस को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जांच में कथित नमूना प्रश्न पत्र के एक सौ चालीस सवाल वास्तविक परीक्षा से मेल खाने का दावा किया गया है, जिसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 11 मई 2026 ।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर मंडराया बड़ा विवाद
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नीट स्नातक परीक्षा दो हजार छब्बीस के बाद प्रश्न पत्र लीक होने की आशंका ने लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। राजस्थान में सामने आए मामले में दावा किया गया है कि परीक्षा से पहले लाखों रुपये लेकर एक कथित नमूना प्रश्न पत्र बेचा गया था। जांच में सामने आया कि उस प्रश्न पत्र के कई सवाल वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे।
एक सौ चालीस सवाल मिलने से बढ़ा संदेह
जांच में सामने आया है कि कथित नमूना प्रश्न पत्र में मौजूद तीन सौ सवालों में से करीब एक सौ चालीस सवाल वास्तविक परीक्षा से काफी हद तक मेल खाते थे। इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने मामले को गंभीरता से लिया और केंद्रीय जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दी। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल संयोग नहीं हो सकता और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। सामाजिक माध्यमों पर भी इस मामले को लेकर सरकार और परीक्षा एजेंसियों पर सवाल उठ रहे हैं।
केरल से राजस्थान तक फैला संदिग्ध जाल
जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच में पता चला है कि कथित नमूना प्रश्न पत्र केरल से राजस्थान के सीकर तक पहुंचाया गया था। इससे शक और गहरा गया है कि इस पूरे मामले के पीछे कई राज्यों में फैला बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है। जांच दल अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि प्रश्न पत्र किन लोगों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया और इसके बदले कितनी रकम वसूली गई। जांच एजेंसियों ने कई स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि इस मामले में बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है तो कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने दी सफाई
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि परीक्षा पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित कराई गई थी। एजेंसी के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर जैविक पहचान सत्यापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी और प्रश्न पत्रों के सुरक्षित परिवहन जैसी कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। एजेंसी ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।एजेंसी का यह भी कहना है कि आठ मई को ही पूरे मामले की जानकारी जांच एजेंसियों को सौंप दी गई थी। हालांकि विपक्षी दल और छात्र संगठन एजेंसी की सफाई से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं।
छात्रों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
नीट परीक्षा देशभर के लाखों विद्यार्थियों के लिए डॉक्टर बनने का सबसे बड़ा माध्यम मानी जाती है। ऐसे में प्रश्न पत्र लीक की आशंका ने छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चे वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ लोग पैसे के दम पर व्यवस्था को कमजोर कर देते हैं। इससे मेहनती विद्यार्थियों का मनोबल टूटता है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
शिक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया से बढ़ी बहस
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उनका कहना है कि यदि पेपर लीक या समान प्रश्न पत्र मिलने की पुष्टि होती है तो यह भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि परीक्षा प्रक्रिया में ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा या अधिक सख्त डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम अपनाए जाने चाहिए
परीक्षा रद्द या पुनः परीक्षा की मांग उठी
छात्र संगठनों ने मांग की है कि यदि जांच में पेपर लीक या बड़े स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है तो पूरी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए। उनका कहना है कि यह मामला केवल कुछ छात्रों का नहीं बल्कि पूरे देश के लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। कई संगठनों ने इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
साइबर सुरक्षा को लेकर नए सवाल
इस पूरे विवाद ने परीक्षा प्रणाली की साइबर सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रश्न पत्र डिजिटल या ऑफलाइन किसी भी माध्यम से लीक हुआ है तो सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मानी जाएगी। ऐसे मामलों को रोकने के लिए एन्क्रिप्शन तकनीक और रीयल टाइम मॉनिटरिंग को और मजबूत करने की जरूरत है।
राजनीतिक हलचल भी तेज होने की संभावना
इस मामले के राजनीतिक रूप लेने की संभावना भी बढ़ गई है। विपक्षी दलों द्वारा सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं और जांच की निष्पक्षता को लेकर मांग की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और विधानसभा दोनों जगह चर्चा में रह सकता है।