कच्चे तेल में बड़ी गिरावट जारी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड 77 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के आयात बिल और महंगाई पर राहत मिल सकती है, हालांकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की संभावना कम है।

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट जारी

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 25 जून 2026

चार महीने के निचले स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 77 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत देखने को मिली है। ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड लगभग 76.47 डॉलर प्रति बैरल, डब्ल्यूटीआई क्रूड 72.63 डॉलर प्रति बैरल और मुरबन क्रूड 69.63 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।

युद्ध के दौरान 120 डॉलर तक पहुंचा था तेल

इस वर्ष फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया था। जवाबी कार्रवाई के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कच्चे तेल की कीमतें उछलकर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस मार्ग में व्यवधान आने से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा था।

कई देशों में बढ़ा था ईंधन संकट

तेल की कीमतों में उछाल का असर दुनिया भर में देखने को मिला। पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन और भारत सहित कई देशों में ईंधन और गैस की लागत बढ़ गई। बढ़ती कीमतों ने महंगाई को भी हवा दी, जिससे आम लोगों और उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।भारत में भी सरकारी तेल कंपनियों को बढ़ती लागत का सामना करना पड़ा, जिसके चलते पिछले वर्षों में कई बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई थी।

शांति समझौते के बाद सुधरे हालात

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद वैश्विक तनाव में कमी आई है। साथ ही अमेरिकी प्रशासन द्वारा सीमित अवधि के लिए ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दिए जाने से आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है।बाजार विश्लेषकों का कहना है कि एशियाई देशों की ओर कच्चे तेल की बड़ी खेप भेजी जा रही है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन में सुधार हो रहा है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख उत्पादन केंद्रों में भी परिचालन सामान्य होने लगा है।

एशियाई खरीदारों को मिल रही छूट

कमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान एशियाई देशों को कच्चे तेल पर आकर्षक छूट दे रहा है। वहीं खाड़ी देशों के उत्पादकों ने भी उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन सामान्य बना रहता है तो आने वाले समय में बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रह सकती है।

क्या सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कच्चे तेल के सस्ता होने से खुदरा ईंधन कीमतों में तुरंत कमी आना तय नहीं माना जा सकता।भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं। इनमें केंद्रीय और राज्य कर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, विपणन लागत और अन्य परिचालन व्यय शामिल हैं। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लग सकता है।

भारत को मिल सकती है आर्थिक राहत

विश्लेषकों का मानना है कि सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे देश का आयात बिल कम हो सकता है, विदेशी मुद्रा पर दबाव घट सकता है और रुपये को मजबूती मिल सकती है। साथ ही महंगाई दर को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी भी बदलाव का फैसला तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है, लेकिन यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं तो भविष्य में ईंधन कीमतों पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।