केरल विधानसभा में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम, पूर्व वाम नेता जी. सुधाकरन बने अस्थायी अध्यक्ष
केरल विधानसभा में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व वाम नेता जी. सुधाकरन को विधानसभा का अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने तिरुवनंतपुरम में उन्हें शपथ दिलाई। वह 139 नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे।
दि राइजिंग न्यूज | तिरुवनंतपुरम 20 मई 2026
केरल विधानसभा को मिला नया अस्थायी अध्यक्ष
केरल की नई विधानसभा के गठन के बीच राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अनुभवी नेता और पूर्व वामपंथी चेहरा जी. सुधाकरन को विधानसभा का अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया है। बुधवार को राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।इस मौके पर मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य भी मौजूद रहे। सुधाकरन अब विधानसभा की शुरुआती कार्यवाही का संचालन करेंगे और नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
139 नवनिर्वाचित विधायकों को दिलाएंगे शपथ
अस्थायी अध्यक्ष बनने के बाद जी. सुधाकरन गुरुवार को विधानसभा में 139 नए विधायकों को पद की शपथ दिलाएंगे। यह प्रक्रिया नई सरकार और नई विधानसभा के औपचारिक गठन का अहम हिस्सा मानी जाती है।हालांकि उनका कार्यकाल बेहद छोटा रहने वाला है क्योंकि शुक्रवार को विधानसभा के स्थायी अध्यक्ष का चुनाव होना तय है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या होने के कारण कांग्रेस नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन का अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
कभी वामपंथ का बड़ा चेहरा रहे हैं सुधाकरन
जी. सुधाकरन लंबे समय तक वामपंथी राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते रहे हैं। दक्षिण केरल में उनका प्रभाव काफी मजबूत रहा है और वह राज्य की राजनीति में एक अनुभवी रणनीतिकार के रूप में पहचाने जाते हैं।उन्होंने वाम शासन के दौरान मंत्री के रूप में भी काम किया और कई अहम विभाग संभाले। लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने वाम दल से दूरी बना ली थी।
पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर लड़ा चुनाव
इस बार विधानसभा चुनाव में सुधाकरन ने पार्टी की आधिकारिक नीति के खिलाफ जाकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनके इस कदम ने केरल की राजनीति में बड़ा संदेश दिया था।उन्होंने अपने पारंपरिक क्षेत्र अंबालापुझा से चुनाव लड़ा और कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा ने उन्हें खुला समर्थन दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही समर्थन उनकी जीत की बड़ी वजह बना।
विधानसभा में बदला राजनीतिक समीकरण
इस बार केरल विधानसभा के आंकड़ों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को स्पष्ट बहुमत मिला है और उसके पास 102 सीटें हैं। वहीं वाम लोकतांत्रिक मोर्चे की ताकत घटकर 35 सीटों तक पहुंच गई है।भारतीय जनता पार्टी ने भी इस बार तीन सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। ऐसे में विधानसभा के भीतर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलते दिखाई दे रहे हैं।
सबकी नजर अब वाम विधायकों के रवैये पर
राजनीतिक गलियारों में अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि जब जी. सुधाकरन विधानसभा की अध्यक्षीय कुर्सी संभालेंगे, तब वाम दल के विधायक किस तरह का व्यवहार करेंगे। क्योंकि सुधाकरन कभी उसी दल के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं।विधानसभा की शुरुआती कार्यवाही के दौरान सदन का माहौल काफी दिलचस्प रह सकता है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की नजरें अब सदन की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
नई सरकार के गठन के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
इससे पहले राज्य में कांग्रेस नेता वी. डी. सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ 21 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। नई सरकार बनने के बाद अब विधानसभा की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केरल की नई विधानसभा में इस बार सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है। ऐसे में शुरुआती कार्यवाही से ही राज्य की राजनीति का नया रुख साफ होने लगा है।