होर्मुज में बहाल हुआ समुद्री यातायात

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात दोबारा शुरू होने के बाद 11 भारत आने वाले जहाज सुरक्षित रूप से मार्ग पार कर चुके हैं। हालांकि 10 भारतीय जहाज अभी भी क्षेत्र में इंतजार कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है।

होर्मुज में बहाल हुआ समुद्री यातायात

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 24 जून 2026

होर्मुज से 11 भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात दोबारा सामान्य होने लगा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 17 जून से अब तक भारत आने वाले 11 जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। इसके साथ ही दो भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी में प्रवेश कर चुके हैं, जबकि 10 भारतीय जहाज अब भी क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 से 25 प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से होकर गुजरती है।सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों का तेल इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक तेल कीमतों और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर डाल सकती है।भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 80 से 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें होर्मुज मार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

तीन बड़े तेल टैंकर पहुंचे भारत की ओर

भारतीय ध्वज वाले तीन बड़े क्रूड ऑयल टैंकर देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुके हैं। इन जहाजों में कुल 8 लाख 60 हजार मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है।इन जहाजों पर 94 भारतीय नाविक सवार हैं। देश वैभव गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंच चुका है, जबकि देश विभोर सिक्का बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। सनमार हेराल्ड के 1 जुलाई को ओडिशा के परादीप बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।इसके अलावा विदेशी ध्वज वाले एक एलपीजी कैरियर, एक कच्चा तेल टैंकर और छह बल्क कैरियर भी भारत के लिए खाद्यान्न और उर्वरक लेकर आ रहे हैं।

उर्वरक आपूर्ति भी बनी हुई है सामान्य

कृषि क्षेत्र के लिए राहत की बात यह है कि उर्वरकों की आपूर्ति भी प्रभावित नहीं हुई है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार चार जहाज यूरिया, डीएपी और सल्फर लेकर होर्मुज पार कर चुके हैं।ये जहाज आंध्र प्रदेश के कृष्णापट्टनम और काकिनाडा, ओडिशा के परादीप तथा गुजरात के मुंद्रा बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों की उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत की समुद्री और कूटनीतिक तैयारी

हालिया क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा और कृषि आपूर्ति श्रृंखला बनी रहना सरकार की रणनीतिक तैयारियों को दर्शाता है। सरकार शिपिंग कंपनियों, बंदरगाह प्राधिकरणों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है।पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत किया है और आपूर्ति बाधित होने की स्थिति के लिए वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार की हैं।

अभी भी बनी हुई है सतर्कता की जरूरत

हालांकि होर्मुज में यातायात बहाल हो चुका है, लेकिन 10 भारतीय जहाजों का अब भी प्रतीक्षा में रहना संकेत देता है कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। भारत को दीर्घकालिक रणनीति के तहत घरेलू तेल उत्पादन बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में प्रयास तेज करने होंगे। फिलहाल होर्मुज से जहाजों की सफल आवाजाही भारत के लिए राहत और सकारात्मक संकेत लेकर आई है।