भारतीय सेना का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

भारतीय सेना अपने 2400 पुराने टी-72 टैंकों को रिटायर करने के बजाय रोबोटिक और मानवरहित लड़ाकू वाहनों में बदलने की तैयारी कर रही है। यह पहल सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने, आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने और सेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारतीय सेना का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 24 जून 2026

पुराने टी 72 टैंक बनेंगे भविष्य के योद्धा

भारतीय सेना अपने बेड़े में शामिल लगभग 2400 पुराने टी-72 टैंकों को रिटायर करने के बजाय उन्हें अत्याधुनिक रोबोटिक और मानवरहित लड़ाकू वाहनों में बदलने की योजना पर काम कर रही है। यह कदम भारतीय सैन्य रणनीति और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।दशकों तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले ये टैंक अब लगभग 40 वर्ष पुराने हो चुके हैं। पहले इन्हें वर्ष 2030 से चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाने की योजना थी, लेकिन नई तकनीक के उपयोग से इनकी सेवा अवधि 15 से 20 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है।

सैनिकों की सुरक्षा होगी प्राथमिकता

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाले सैन्य अभियानों में सैनिकों की जान बचाना है। भविष्य में ऐसे क्षेत्रों में जहां दुश्मन का खतरा अधिक होगा, वहां इन मानवरहित टैंकों को सबसे आगे तैनात किया जाएगा।इन टैंकों को रिमोट कंट्रोल और स्वचालित प्रणाली से संचालित किया जा सकेगा। इसके बावजूद उनकी मारक क्षमता पूरी तरह बरकरार रहेगी और वे दुश्मन के ठिकानों पर प्रभावी हमला करने में सक्षम होंगे।

इंसान और मशीन मिलकर लड़ेंगे युद्ध

रोबोटिक टी-72 टैंक सेना के टी-90 भीष्म टैंकों और भविष्य के फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल्स के साथ मिलकर काम करेंगे। इस रणनीति को मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग यानी एमयूएम-टी कहा जाता है।इस मॉडल में मानव चालक वाले और मानवरहित टैंक एक साथ अभियान चलाएंगे, जिससे युद्धक्षेत्र में अधिक प्रभावी और सुरक्षित संचालन संभव हो सकेगा।

आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का समाधान

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ड्रोन, एंटी-टैंक मिसाइलों और टॉप-अटैक हथियारों के कारण पारंपरिक टैंकों के लिए खतरा बढ़ गया है।ऐसी परिस्थितियों में टैंक के भीतर मौजूद सैनिकों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन जाती है। भारतीय सेना का यह कदम आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप एक व्यावहारिक और किफायती समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

हर टैंक पर आएगा करोड़ों का खर्च

जानकारी के अनुसार प्रत्येक टी-72 टैंक को मानवरहित प्रणाली में बदलने पर लगभग 25 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने टैंकों को कबाड़ में बदलने के बजाय उन्हें नई तकनीक से लैस करना अधिक लाभदायक होगा।इन टैंकों में पहले से मौजूद 125 मिमी की शक्तिशाली तोप को बरकरार रखा जाएगा, जबकि उनमें आधुनिक सेंसर, कैमरे और स्वचालित नियंत्रण प्रणाली जोड़ी जाएगी।

माइनफील्ड और खतरनाक मिशनों में होगी तैनाती

इन रोबोटिक टैंकों का उपयोग विशेष रूप से उन अभियानों में किया जाएगा जहां जोखिम का स्तर अत्यधिक होता है। युद्ध के दौरान दुश्मन द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्रों में इन्हें आगे भेजा जा सकेगा।ये टैंक बिना किसी मानवीय जोखिम के माइनफील्ड को पार करते हुए रास्ता साफ करेंगे और पीछे आने वाले सैनिकों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार करेंगे।

भविष्य की सेना की ओर बड़ा कदम

यह परियोजना केवल पुराने टैंकों के पुनः उपयोग तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय सेना की भविष्य की युद्ध रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेना धीरे-धीरे मानव और मशीन के संयुक्त संचालन की दिशा में आगे बढ़ रही है।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को मजबूत करेगी और सैनिकों को सुरक्षित रखते हुए दुश्मन पर अधिक प्रभावी कार्रवाई करने में मदद करेगी। पुराने टी-72 टैंक अब नए रूप में भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने वाले रोबोटिक योद्धा बनकर उभर सकते हैं।