मुस्लिम राजनीति में बढ़ी सियासी तल्खी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मुस्लिम मुद्दों पर सपा की भूमिका को लेकर इमरान मसूद लगातार सवाल उठा रहे हैं, जिससे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नई सियासी बहस शुरू हो गई है।

मुस्लिम राजनीति में बढ़ी सियासी तल्खी

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 24 जून 2026

मुस्लिम मुद्दों पर बढ़ी बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन कायम रहने के बावजूद दोनों दलों के नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। उनके बयानों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।इमरान मसूद का आरोप है कि समाजवादी पार्टी मुस्लिम समुदाय का समर्थन तो प्राप्त करती है, लेकिन उनके मुद्दों पर पर्याप्त मुखरता नहीं दिखाती। उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों से कहा है कि मुस्लिम समाज से जुड़े मामलों पर सपा नेतृत्व की चुप्पी सवाल खड़े करती है।

ओवैसी जैसी रणनीति की चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इमरान मसूद का आक्रामक रुख असदुद्दीन ओवैसी की शैली से मिलता-जुलता दिखाई देता है। ओवैसी लंबे समय से मुस्लिम नेतृत्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर सपा को चुनौती देते रहे हैं। अब इमरान मसूद भी इसी तरह मुस्लिम समुदाय के सवालों को प्रमुखता से उठाते नजर आ रहे हैं।उनके बयानों का उद्देश्य मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत करना माना जा रहा है। साथ ही वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस भी मुस्लिम समुदाय की आवाज उठाने में सक्रिय भूमिका निभा सकती है।

पुरानी राजनीतिक नाराजगी भी बनी वजह

इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के संबंध हमेशा सहज नहीं रहे हैं। वर्ष 2007 में विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट न मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी। इसके बाद भी कई मौकों पर टिकट वितरण और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर उनका सपा नेतृत्व से मतभेद रहा।वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने सपा का दामन थामा था, लेकिन उन्हें अपेक्षित राजनीतिक महत्व नहीं मिला। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और फिर कांग्रेस में वापसी की। माना जाता है कि उसी दौर की नाराजगी आज भी उनके राजनीतिक रुख को प्रभावित करती है।

2024 की जीत के बाद बदले तेवर

लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गठबंधन के तहत इमरान मसूद सहारनपुर से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। हालांकि टिकट चयन को लेकर उस समय भी काफी राजनीतिक खींचतान देखने को मिली थी।सांसद बनने के बाद इमरान मसूद ने खुलकर अपनी राजनीतिक राय रखनी शुरू की और कई बार अखिलेश यादव की रणनीति तथा नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए। इससे दोनों दलों के समर्थकों के बीच भी बहस तेज हो गई है।

2027 चुनाव से पहले नई चुनौती

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुस्लिम वोटों की राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। इमरान मसूद के लगातार आक्रामक बयानों को इसी व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मुस्लिम मतदाताओं के बीच वैकल्पिक नेतृत्व की चर्चा मजबूत होती है तो इसका असर समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। वहीं कांग्रेस के लिए यह अवसर हो सकता है कि वह अपने जनाधार को और मजबूत करने की कोशिश करे।फिलहाल इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के बीच बढ़ती तल्खी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण का संकेत दे रही है, जिस पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।