अमेरिका ने चीनी छात्रों के वीजा पर लगाई बड़ी रोक, चीन ने जताई कड़ी आपत्ति — क्या फिर बिगड़ेंगे रिश्ते?

दि राइजिंग न्यूज। वॉशिंगटन/बीजिंग। 29 मई, 2025।   अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चीनी छात्रों के वीज़ा में भारी कटौती की है। यह फैसला खासकर उन छात्रों पर असर डाल रहा है जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में पढ़ाई कर रहे हैं। इस कदम से न सिर्फ छात्रों में नाराज़गी है, बल्कि बीजिंग ने इसे राजनीतिक और भेदभावपूर्ण बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

अमेरिका ने चीनी छात्रों के वीजा पर लगाई बड़ी रोक, चीन ने जताई कड़ी आपत्ति — क्या फिर बिगड़ेंगे रिश्ते?
America imposed a major ban on visas for Chinese students

दि राइजिंग न्यूज। वॉशिंगटन/बीजिंग। 29 मई, 2025। 

 अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चीनी छात्रों के वीज़ा में भारी कटौती की है। यह फैसला खासकर उन छात्रों पर असर डाल रहा है जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में पढ़ाई कर रहे हैं। इस कदम से न सिर्फ छात्रों में नाराज़गी है, बल्कि बीजिंग ने इसे राजनीतिक और भेदभावपूर्ण बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।


क्यों उठाया अमेरिका ने यह कदम?

अमेरिका का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी था। अमेरिकी विदेश विभाग और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर उन छात्रों के वीजा अस्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू की है, जो चीन की सेना या संवेदनशील तकनीकी संस्थानों से जुड़े माने जाते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कठोर नीति से जासूसी और तकनीकी चोरी पर लगाम लगाई जा सकेगी।


चीन की तीखी प्रतिक्रिया

चीन ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अमेरिका पर शैक्षणिक भेदभाव का आरोप लगाया है। बीजिंग ने कहा कि यह कार्रवाई दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को नुकसान पहुंचा सकती है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा:

"यह फैसला विचारधारा और सुरक्षा का बहाना बनाकर चीनी छात्रों के वैध अधिकारों का हनन करता है।"

चीन ने वाशिंगटन से औपचारिक रूप से विरोध जताते हुए वीजा नीति में बदलाव की मांग की है।


छात्रों का गुस्सा और तनाव

हजारों चीनी छात्र जो पहले से ही अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं या जल्द शुरू करने वाले थे, अब अनिश्चितता और तनाव में हैं। कई छात्रों के वीजा अचानक रद्द कर दिए गए, जबकि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया था। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बीजिंग और शंघाई जैसे शहरों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं।


अमेरिकी यूनिवर्सिटी की चिंता

MIT, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और UC बर्कले जैसे नामी संस्थानों ने भी चिंता जताई है कि इससे अमेरिका की वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीनी छात्र अब भी बड़ी संख्या में हैं — 2023-24 में यह संख्या 2.77 लाख थी, हालांकि भारत अब विदेशी छात्रों की संख्या में पहले स्थान पर पहुंच गया है।


क्या फिर बिगड़ेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?

अभी हाल ही में अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड डील के जरिए रिश्तों में थोड़ी नरमी आई थी, लेकिन इस वीज़ा विवाद ने एक बार फिर तनाव का माहौल बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है — जैसे अमेरिकी छात्रों, कंपनियों या संस्थानों पर प्रतिबंध लगाना।