काउंटिंग ड्यूटी में केंद्रीय कर्मचारी वैध, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर टीएमसी को झटका

सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को नियमों के अनुरूप बताया है। तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के निर्देश वैध हैं और इसमें किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने आयोग के आश्वासन को रिकॉर्ड में लेते हुए मतगणना प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी।

काउंटिंग ड्यूटी में केंद्रीय कर्मचारी वैध, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर टीएमसी को झटका

दि राइजिंग न्यूज डेस्क |  2 मई 2026 ।

मतगणना ड्यूटी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा निर्णय

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने अहम टिप्पणी करते हुए तृणमूल कांग्रेस को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती नियमों के विरुद्ध नहीं है और इस पर किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के पक्ष को रिकॉर्ड में लेते हुए प्रक्रिया को वैध माना। इस निर्णय के बाद मतगणना व्यवस्था पर उठ रहे सवालों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।


निर्वाचन आयोग के निर्देशों को अदालत की मंजूरी

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को नियमों के अनुरूप माना जाएगा। आयोग ने अदालत को बताया कि पहले जारी परिपत्र का पालन पूरी तरह किया जाएगा। अदालत ने इस आश्वासन को स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि मतगणना प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ आगे बढ़नी चाहिए।


केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति पर उठे सवाल

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। पार्टी का कहना था कि इससे राजनीतिक प्रभाव की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही की जा रही है और इसमें कोई अनियमितता नहीं है।


हर टेबल पर नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट

सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रत्येक मतगणना टेबल पर नियुक्त कर्मचारी केंद्रीय या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि नियमों में इस प्रकार की व्यवस्था पहले से मौजूद है। इसलिए इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि राज्य सरकार के कर्मचारी भी प्रक्रिया का हिस्सा रह सकते हैं।


तृणमूल कांग्रेस की ओर से उठाए गए मुद्दे

तृणमूल कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि उन्हें निर्वाचन आयोग के निर्देशों की जानकारी देर से मिली। पार्टी ने यह सवाल उठाया कि गड़बड़ी की आशंका किस आधार पर व्यक्त की गई है। हालांकि अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। सुनवाई के दौरान पार्टी ने यह भी कहा कि कम से कम एक कर्मचारी राज्य सरकार का होना चाहिए।


वरिष्ठ वकील की दलीलें और अदालत की प्रतिक्रिया

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर संदेह बना हुआ है। लेकिन अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नियमों के अनुसार व्यवस्था वैध है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रस्तुत की गई व्याख्या सही नहीं है।


निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ा पूरा विवाद

यह पूरा विवाद निर्वाचन आयोग के उस निर्देश से जुड़ा है जिसमें प्रत्येक मतगणना टेबल पर एक कर्मचारी केंद्रीय या सार्वजनिक क्षेत्र से रखने की बात कही गई थी। तृणमूल कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पार्टी का दावा था कि इससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। हालांकि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने आयोग के निर्णय को सही ठहराया।


सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद मतगणना प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद काफी हद तक समाप्त माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती नियमों के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार की रोक की आवश्यकता नहीं है। अब आगामी मतगणना प्रक्रिया तय समय पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संपन्न होगी।