शाम 7 बजे खुलता था ऑफिस, रात 3 बजे होता था बंद... लखनऊ में MNC नहीं, विदेशियों को ठगने वाली कंपनी चल रही थी

लखनऊ में पुलिस ने विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर कथित रूप से ठगी करने वाले एक फर्जी संपर्क केंद्र का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान ११९ लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस पूरे नेटवर्क और आर्थिक लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।

शाम 7 बजे खुलता था ऑफिस, रात 3 बजे होता था बंद... लखनऊ में MNC नहीं, विदेशियों को ठगने वाली कंपनी चल रही थी
शाम 7 बजे खुलता था ऑफिस, रात 3 बजे होता था बंद... लखनऊ में MNC नहीं, विदेशियों को ठगने वाली कंपनी चल रही थी

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 2 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर कथित रूप से ठगी करने वाले एक बड़े फर्जी संपर्क केंद्र का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई को हाल के समय की सबसे बड़ी पुलिस कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। छापेमारी के दौरान 119 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कार्यालय से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री भी बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आधुनिक कार्यालय की आड़ में लंबे समय से विदेशी नागरिकों को झांसा देकर आर्थिक ठगी को अंजाम दे रहा था। अब पुलिस पूरे नेटवर्क, उसके संचालकों और आर्थिक लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है।

चमचमाती इमारत के भीतर चल रहा था कथित ठगी का पूरा तंत्र

जिस इमारत में यह संपर्क केंद्र संचालित हो रहा था, वह बाहर से किसी प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी के कार्यालय जैसी दिखाई देती थी। आधुनिक साज-सज्जा, सुरक्षा व्यवस्था और व्यवस्थित कार्यशैली के कारण किसी को भी वहां अवैध गतिविधियां संचालित होने का संदेह नहीं होता था। पुलिस को काफी समय से इस स्थान को लेकर गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं। जब पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद छापेमारी की गई, तब अंदर मौजूद व्यवस्था और गतिविधियों को देखकर जांच एजेंसियां भी हैरान रह गईं। इसके बाद पूरे परिसर को पुलिस ने अपने नियंत्रण में लेकर विस्तृत जांच शुरू कर दी।

शाम 7 बजे खुलता था दफ्तर, रात 3 बजे तक चलता था ठगी का खेल! लखनऊ में फर्जी संपर्क केंद्र का भंडाफोड़

जांच में यह भी सामने आया कि इस कथित फर्जी संपर्क केंद्र का संचालन सामान्य कार्यालयों की तरह सुबह से नहीं होता था। यहां प्रतिदिन शाम लगभग सात बजे कर्मचारियों की उपस्थिति शुरू होती थी और देर रात लगभग तीन बजे तक काम चलता था। जांच अधिकारियों का मानना है कि विदेशी देशों के समय के अनुसार संपर्क करने के उद्देश्य से यह समय निर्धारित किया गया था। इसी कारण अधिकांश कर्मचारी पूरी रात कार्यालय में सक्रिय रहते थे और विदेशी नागरिकों से लगातार संपर्क साधते थे। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि इस पूरे संचालन की योजना किस स्तर पर तैयार की जाती थी।

छापेमारी के दौरान 119 लोगों को हिरासत में लेकर शुरू हुई पूछताछ

पुलिस की कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मौजूद 119 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें कर्मचारी, पर्यवेक्षक और प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है। अधिकारियों ने सभी से विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन व्यक्ति किस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा था। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में संगणक, दूरभाष उपकरण, अभिलेख, संग्रहण यंत्र और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी जब्त की है। इन सभी उपकरणों की तकनीकी जांच कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इनके माध्यम से कितने लोगों से संपर्क किया गया।

विदेशी नागरिकों को अलग-अलग बहानों से बनाते थे कथित शिकार

प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह विदेशी नागरिकों से संपर्क कर उन्हें विभिन्न प्रकार की सेवाओं का झांसा देता था। कभी तकनीकी सहायता के नाम पर तो कभी वित्तीय समाधान या अन्य सुविधाओं का भरोसा देकर उनसे धन की मांग की जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह जानकारी जुटा रही हैं कि इस कथित गिरोह ने किन-किन देशों के नागरिकों को निशाना बनाया और कुल कितनी आर्थिक ठगी की गई। इसके साथ ही बैंक खातों, धन के लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

पुलिस पूरे नेटवर्क और मास्टरमाइंड तक पहुंचने में जुटी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और अभी पूरे नेटवर्क का खुलासा होना बाकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित गिरोह का संचालन कौन कर रहा था और इसके तार देश के अन्य राज्यों या विदेशों तक जुड़े हुए हैं या नहीं। हिरासत में लिए गए लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनके बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई एजेंसियों की चिंता

हाल के वर्षों में डिजिटल माध्यमों से होने वाली ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे गिरोह आधुनिक कार्यालयों और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास करते हैं। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार के मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति या संस्था के झांसे में आकर अपनी व्यक्तिगत अथवा वित्तीय जानकारी साझा न करें।