प्याज किसानों का फूटा गुस्सा, मांगा राहत पैकेज: केंद्र से मांगे 10 हजार करोड़ रुपये
महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने गिरती कीमतों, निर्यात प्रतिबंधों और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। किसानों ने स्थायी निर्यात नीति, भंडारण सुविधाओं, प्रसंस्करण उद्योग और राष्ट्रीय प्याज स्थिरीकरण कोष बनाने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि किसानों को आर्थिक सुरक्षा दिए बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता।
दि राइजिंग न्यूज़। नागपुर। 1 जून 2026
प्याज संकट गहराया, महाराष्ट्र के किसानों ने केंद्र सरकार से 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की महाराष्ट्र में प्याज किसानों का संकट लगातार गहराता जा रहा है। गिरती कीमतों, निर्यात प्रतिबंधों, प्राकृतिक आपदाओं और बढ़ती लागत से परेशान किसानों ने अब केंद्र सरकार से 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए किसानों को आर्थिक राहत देने की अपील की है।
संघ के संस्थापक-अध्यक्ष भरत दिघोले का कहना है कि पिछले कई वर्षों से प्याज उत्पादकों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि निर्यात संबंधी नीतियों, बाजार में सरकारी हस्तक्षेप और प्राकृतिक आपदाओं ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
निर्यात प्रतिबंधों से बढ़ी किसानों की मुश्किल
किसान संगठन का कहना है कि वर्ष 2019, 2020 और 2023-24 के दौरान प्याज निर्यात पर लगाई गई रोक, निर्यात शुल्क और न्यूनतम निर्यात मूल्य जैसी शर्तों ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया। किसानों का आरोप है कि इन फैसलों के कारण उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाया। संगठन का यह भी कहना है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा कम कीमत पर बफर स्टॉक का प्याज बाजार में उतारने से खुले बाजार में कीमतें और नीचे चली गईं, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा।
मौसम की मार ने बढ़ाई परेशानी
किसानों के अनुसार अत्यधिक वर्षा, ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश, बाढ़, सूखा, फसल रोग और नकली बीजों की समस्या ने उत्पादन लागत बढ़ा दी है। इसके अलावा जिन किसानों ने पिछले वर्ष प्याज का भंडारण किया था, उन्हें इस वर्ष बेहद कम कीमतों पर अपनी उपज बेचने को मजबूर होना पड़ा। किसान संगठन ने मांग की है कि हुए नुकसान की भरपाई सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाए ताकि उन्हें तत्काल राहत मिल सके।
भंडारण और प्रसंस्करण उद्योग की मांग
किसानों ने प्रमाणित बीजों पर अनुदान, भंडारण शेड और गोदामों के निर्माण पर शत-प्रतिशत सहायता देने की मांग की है। साथ ही प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने की भी मांग उठाई गई है। संगठन का कहना है कि प्याज पाउडर, प्याज फ्लेक्स, डिहाइड्रेटेड प्याज और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों की इकाइयों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।
स्थायी निर्यात नीति की मांग
किसानों ने सरकार से बार-बार निर्यात रोक लगाने की नीति समाप्त करने और स्थायी राष्ट्रीय प्याज निर्यात नीति लागू करने की मांग की है। इसके अलावा प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आने पर किसानों को तत्काल सहायता देने के लिए राष्ट्रीय प्याज स्थिरीकरण कोष बनाने की भी मांग की गई है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि प्याज उत्पादकों को आर्थिक सुरक्षा नहीं मिली तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उनका मानना है कि मजबूत किसान ही मजबूत गांव और मजबूत देश की नींव होते हैं।