बातचीत ही रास्ता: एससीओ मंच से राजनाथ सिंह का कड़ा संदेश, आतंकवाद पर शून्य सहनशीलता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में स्पष्ट कहा कि युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति ही वैश्विक समस्याओं का समाधान है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति दोहराते हुए सभी देशों से एकजुट होकर सख्त कार्रवाई करने की अपील की।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में स्पष्ट कहा कि युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति ही वैश्विक समस्याओं का समाधान है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति दोहराते हुए सभी देशों से एकजुट होकर सख्त कार्रवाई करने की अपील की।

बातचीत ही रास्ता: एससीओ मंच से राजनाथ सिंह का कड़ा संदेश, आतंकवाद पर शून्य सहनशीलता

दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 28 अप्रैल 2026 ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भारत का स्पष्ट और दृढ़ पक्ष रखते हुए दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संघर्ष नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति ही समस्याओं का समाधान है। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता के लिए भारत की पहल के रूप में देखा जा रहा है।


वैश्विक हालात पर भारत की चिंता

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में दुनिया खंडित होती जा रही है और देशों के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एकतरफावाद और टकराव की राजनीति वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। हाल के वर्षों में बढ़ते युद्ध और संघर्षों ने न केवल मानव जीवन को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक संतुलन को भी बिगाड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समय सभी देशों को आत्ममंथन करने की जरूरत है ताकि एक स्थिर और सुरक्षित वैश्विक व्यवस्था बनाई जा सके।


आतंकवाद पर कड़ा रुख

रक्षा मंत्री ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को आज की दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इन खतरों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एकजुट प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या सीमा नहीं होती और इसे किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं पूरी मानवता को झकझोर देती हैं और यह साबित करती हैं कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाना अनिवार्य है।


जीरो सहनशीलता नीति और भारत का संदेश

राजनाथ सिंह ने भारत की ‘शून्य सहनशीलता’ नीति को दोहराते हुए कहा कि देश आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सभी देशों से अपील की कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड छोड़कर एक समान और सख्त नीति अपनाई जाए। उनके अनुसार, जब तक सभी देश एकजुट होकर कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक इस वैश्विक खतरे को खत्म करना संभव नहीं है।


क्षेत्रीय सहयोग और संयुक्त प्रयास की जरूरत

उन्होंने क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी ढांचे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अलगाववाद, कट्टरपंथ और आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह समय प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहयोग का है।
उन्होंने यह भी कहा कि साझा रणनीति और सूचनाओं के आदान-प्रदान से ही इन खतरों को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।


नया विश्व नहीं, व्यवस्थित विश्व की जरूरत

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि दुनिया को नए विश्व व्यवस्था की नहीं, बल्कि अधिक संगठित और संतुलित व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही स्थायी समाधान निकाला जा सकता है, युद्ध और हिंसा से नहीं।
उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरी दुनिया एक परिवार की तरह है और इसी भावना के साथ आगे बढ़ना ही मानवता के हित में है।


राजनाथ सिंह का यह बयान भारत की वैश्विक नीति और सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जिसमें शांति, सहयोग और सख्ती—तीनों का संतुलन है। जहां एक ओर भारत संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देता है, वहीं दूसरी ओर आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
द राइजिंग न्यूज़ मानता है कि आज के अस्थिर वैश्विक माहौल में भारत का यह रुख न केवल प्रासंगिक है, बल्कि दुनिया के लिए एक दिशा भी तय करता है।