परिसीमन पर क्या है द्रविड़ मुनेत्र कषगम का रुख
परिसीमन विधेयक पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने सरकार से स्पष्ट प्रस्ताव की मांग की। पार्टी ने महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने, दक्षिण भारतीय राज्यों के हित सुरक्षित रखने और लोकसभा सीटों में वृद्धि का प्रावधान जोड़ने की बात कही।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 19 जुलाई 2026
संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम का रुख राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। बैठक के बाद यह दावा किया गया कि पार्टी सरकार के प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है, लेकिन द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र सरकार परिसीमन का पूरा प्रारूप सार्वजनिक नहीं करती, तब तक किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है।द्रविड़ मुनेत्र कषगम का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। इसलिए सरकार को सभी दलों और राज्यों के सामने स्पष्ट प्रस्ताव रखना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। पार्टी ने कहा कि केवल मौखिक आश्वासनों के आधार पर समर्थन देना उचित नहीं होगा।
सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ
मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने परिसीमन और महिला आरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी राय रखी। बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम परिसीमन विधेयक के समर्थन में दिखाई दे रही है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि सरकार ने अभी तक विधेयक का वास्तविक स्वरूप प्रस्तुत ही नहीं किया है।jपार्टी का कहना है कि जब तक विधेयक की सभी धाराएं सार्वजनिक नहीं होतीं और उसके प्रभावों का अध्ययन नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार के समर्थन या विरोध की घोषणा करना जल्दबाजी होगी। इसलिए सरकार को पहले अपना आधिकारिक प्रस्ताव संसद और सभी दलों के सामने रखना चाहिए।
महिला आरक्षण पर पार्टी का स्पष्ट पक्ष
बैठक के दौरान द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी अपना स्पष्ट रुख रखा। पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं है। वर्तमान लोकसभा सीटों के आधार पर ही महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है।पार्टी का मानना है कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ दिया गया तो इसके लागू होने में अनावश्यक देरी होगी। इससे महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए दोनों विषयों को अलग-अलग माना जाना चाहिए।
दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों पर जोर
द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने स्पष्ट कहा कि किसी भी नए परिसीमन में दक्षिण भारतीय राज्यों के राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें किसी भी प्रकार का राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि यदि नए परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी घटने की संभावना बनती है तो परिसीमन की प्रक्रिया को अगले पच्चीस वर्षों तक स्थगित करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि राष्ट्रीय एकता और सभी राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी की मांग
सूत्रों के अनुसार द्रविड़ मुनेत्र कषगम चाहती है कि प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या में पचास प्रतिशत वृद्धि का स्पष्ट प्रावधान शामिल किया जाए। पार्टी का कहना है कि यदि सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है तो राज्यों के प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाए रखना अधिक आसान होगा।पार्टी ने यह भी कहा कि इस संबंध में पहले मौखिक आश्वासन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब आवश्यकता इस बात की है कि इसे विधेयक का औपचारिक हिस्सा बनाया जाए। यदि सरकार ऐसा करती है तो पार्टी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर विचार कर सकती है।
सरकार ने अभी तक नहीं रखा अंतिम प्रस्ताव
हालांकि परिसीमन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के कार्यसूची में इस विधेयक को शामिल नहीं किया है। सरकारी पक्ष का कहना है कि उचित समय आने पर सरकार इस विषय पर निर्णय लेगी और आवश्यक समर्थन भी उसके पास उपलब्ध रहेगा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भविष्य में यह विधेयक संसद में लाया जाता है तो इस पर व्यापक चर्चा और बहस देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों और विपक्षी दलों की भूमिका इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण रहने वाली है।
महत्वपूर्ण बिंदु
- सर्वदलीय बैठक में परिसीमन पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम का रुख चर्चा का विषय बना।
- पार्टी ने कहा कि सरकार पहले विधेयक का पूरा प्रारूप सार्वजनिक करे।
- महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग लागू करने की मांग की गई।
- दक्षिण भारतीय राज्यों के अधिकारों से समझौता न करने की बात दोहराई गई।
- लोकसभा सीटों में पचास प्रतिशत वृद्धि का स्पष्ट प्रावधान जोड़ने की मांग रखी गई।
- सरकार ने अभी तक परिसीमन विधेयक को कार्यसूची में शामिल नहीं किया है।