राम मंदिर चढ़ावा जांच में बड़े खुलासे

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी को कई स्तरों पर गंभीर लापरवाहियां मिली हैं। जांच में नोटों की गिनती से लेकर सुरक्षा जांच, सीसीटीवी निगरानी और कर्मचारियों की नियुक्ति तक अनेक खामियां सामने आई हैं। करीब 140 पन्नों की रिपोर्ट तैयार होने के बाद मामले में बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

राम मंदिर चढ़ावा जांच में बड़े खुलासे

दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 23 जून 2026

एसआईटी जांच में सामने आईं कई बड़ी लापरवाहियां

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की पड़ताल में कई गंभीर अनियमितताएं और प्रशासनिक खामियां सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि दान राशि के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई।सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने लगभग 140 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसमें कई ऐसे बिंदु दर्ज किए गए हैं जिनके आधार पर आगे बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

निजी कर्मचारियों से कराई जा रही थी नोटों की गिनती

जांच में सामने आया है कि राम मंदिर ट्रस्ट की नकदी व्यवस्था से जुड़े कार्यों में निजी एजेंसी के कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही थीं।जानकारी के अनुसार बैंकिंग कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे बैंक ने नोटों को अलग करने, गड्डियां तैयार करने और गिनती कराने के लिए एक निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों को लगाया था। यह भी आरोप है कि इनमें से कई कर्मचारियों की नियुक्ति सिफारिशों के आधार पर की गई थी।

नियुक्तियों को लेकर भी उठे सवाल

एसआईटी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ लोगों को परिचितों और सिफारिशों के आधार पर दान राशि से जुड़े कार्यों में लगाया गया था।जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

न चेकिंग होती थी, न ड्रेस कोड का पालन

रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।जांच के दौरान पाया गया कि ड्यूटी पर आने और जाने वाले कर्मचारियों की नियमित जांच नहीं होती थी। कौन क्या लेकर आ रहा है और क्या लेकर जा रहा है, इसकी प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही थी।इसके अलावा कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड होने के बावजूद उसका पालन नहीं किया जा रहा था। कई कर्मचारी सामान्य कपड़ों में ही नकदी गिनने वाले कक्ष में पहुंच जाते थे।

सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

एसआईटी को सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था में भी खामियां मिली हैं।जांच में यह बात सामने आई कि कैमरों की फुटेज की नियमित और प्रभावी निगरानी नहीं की जाती थी। सूत्रों के मुताबिक कुछ मामलों में कर्मचारियों ने कैमरों के सामने खड़े होकर गतिविधियां कीं, लेकिन निगरानी तंत्र समय पर सतर्क नहीं हो सका।

दान पेटी से बैंक तक हर स्तर पर मिली खामियां

एसआईटी की पड़ताल केवल नकदी गिनती तक सीमित नहीं रही।जांच टीम ने दान पेटियों से धनराशि निकालने, उसे ट्रस्ट के कक्ष तक पहुंचाने, वहां गिनती करने और बाद में बैंक में जमा कराने तक की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन किया। रिपोर्ट में कई चरणों पर प्रक्रियागत कमियां दर्ज की गई हैं।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

इस बीच राम मंदिर की दान राशि और चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका भी दायर की गई है।याचिका में मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने और वित्तीय ऑडिट की मांग की गई है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है।

जांच पूरी होने तक अयोध्या छोड़ने पर रोक

एसआईटी ने जांच के दायरे में आए अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों को बिना सूचना अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है।जांच एजेंसी का मानना है कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों से तत्काल पूछताछ की जा सकती है, इसलिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।

कई सेवादारों पर गिर सकती है कार्रवाई की गाज

सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में कुछ सेवादारों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर मंदिर से जुड़े कई लोगों की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी पूछताछ

जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी विस्तृत पूछताछ की गई।सूत्रों के मुताबिक चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। इन पूछताछों से मिली जानकारियों को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है।

चंपत राय की भूमिका पर भी चर्चा

मामले के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम भी चर्चा के केंद्र में आ गया है।राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े रहे हैं। ऐसे में जांच के दौरान उनकी भूमिका और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है।हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि सादगीपूर्ण रही है और उन पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है।

रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय की जाती है।क्या कार्रवाई केवल कुछ कर्मचारियों और सेवादारों तक सीमित रहेगी या फिर प्रशासनिक और शीर्ष स्तर की जवाबदेही भी निर्धारित की जाएगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक राजनीतिक, प्रशासनिक और धार्मिक गलियारों में एक ही चर्चा है कि 140 पन्नों की रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्ष आने वाले दिनों में किस प्रकार की कार्रवाई का रास्ता खोलेंगे।