राम मंदिर प्रबंधन पर उठे बड़े सवाल

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बीच राम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि अनुभवहीन और अनौपचारिक व्यवस्था के कारण निगरानी तथा जवाबदेही कमजोर हुई है।

राम मंदिर प्रबंधन पर उठे बड़े सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 20 जून 2026

प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। राम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने एक विशेष बातचीत में मंदिर की मौजूदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे ढांचे में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिम्मेदारियां अनुभवी लोगों को सौंपनी चाहिए और वर्तमान प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

अनुभवी लोगों को मिले जिम्मेदारी

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि उन्होंने औपचारिक रूप से कोई प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन सार्वजनिक रूप से अपने विचार साझा किए हैं। उनका मानना है कि मंदिर परिसर का संचालन पूरी तरह व्यवस्थित और पेशेवर तरीके से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनके कार्यों और जिम्मेदारियों को लेकर कोई स्पष्ट लिखित निर्देश मौजूद नहीं हैं।उनके अनुसार परिसर में लगभग 1500 लोग कार्यरत हैं, लेकिन कार्य विभाजन और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था का अभाव दिखाई देता है। यही स्थिति भविष्य में और समस्याएं पैदा कर सकती है।

एसओपी के पालन में कमी

नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 से 2025 के बीच जारी कुछ दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं का अध्ययन किया है। उनके अनुसार यदि इन निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया होता तो वर्तमान स्थिति उत्पन्न नहीं होती।उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों के पहनावे से लेकर सुरक्षा जांच तक का विस्तृत विवरण दिया गया है। यहां तक कि कर्मचारियों के कपड़े बैंक द्वारा उपलब्ध कराए जाने और उनके आने-जाने की जांच की भी व्यवस्था तय थी। हालांकि उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर इन नियमों का प्रभावी अनुपालन नहीं हुआ।

श्रद्धालुओं के विश्वास पर असर

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अत्यंत विश्वास के साथ अपना दान अर्पित करते हैं। कई बार श्रद्धालु भगवान के समक्ष तत्काल अपने आभूषण या मूल्यवान वस्तुएं दानपात्र में डाल देते हैं। ऐसे में उनकी भावनाओं और विश्वास की रक्षा करना मंदिर प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।उन्होंने कहा कि जब दानपात्र खोले जाते हैं तो उनमें नकदी, सिक्के और बहुमूल्य धातुएं एक साथ निकलती हैं। इन सभी की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया में गंभीर कमियां सामने आई हैं।

निगरानी व्यवस्था रही कमजोर

मिश्र ने कहा कि बैंक और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों द्वारा निगरानी की व्यवस्था मौजूद थी, लेकिन उसका संचालन पूरी तरह अनौपचारिक तरीके से किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि नियंत्रण और पर्यवेक्षण दोनों स्तरों पर कमियां दिखाई देती हैं।दान में प्राप्त धन और आभूषणों को बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में भी पर्याप्त निगरानी नहीं थी। उनके अनुसार किसी भी संस्था की सफलता दो स्तंभों पर आधारित होती है — निष्ठा और निगरानी। इस मामले में दोनों पक्षों को नुकसान पहुंचा है।

चंपत राय का किया बचाव

मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को लेकर उठ रहे सवालों पर नृपेंद्र मिश्र ने उनका बचाव किया। उन्होंने कहा कि चंपत राय लंबे समय से संगठनात्मक जीवन से जुड़े रहे हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और संगठन के लिए समर्पित किया है।मिश्र ने कहा कि उनकी सरलता, शालीनता और विश्वास का कुछ लोगों ने गलत फायदा उठाया। उन्होंने इसे व्यवस्था के भीतर विश्वासघात की घटना बताया और कहा कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।

सीसीटीवी व्यवस्था पर उठे सवाल

सीसीटीवी निगरानी को लेकर भी नृपेंद्र मिश्र ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में लगाए गए कैमरों का नियंत्रण ट्रस्ट और पुलिस दोनों के पास था। कुछ कैमरों की निगरानी ट्रस्ट के कर्मचारी भी करते थे जबकि मुख्य नियंत्रण कक्ष पुलिस विभाग के अधीन था।उन्होंने कहा कि तकनीकी निगरानी व्यवस्था में भी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रहती है, जिसके बाद वह स्वतः मिट जाती है।

जांच एजेंसियों के सामने चुनौती

नृपेंद्र मिश्र का मानना है कि रिकॉर्डिंग की सीमित अवधि जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। यदि कथित अनियमितताएं लंबे समय से चल रही थीं तो पुराने वीडियो उपलब्ध नहीं होने के कारण सटीक निष्कर्ष तक पहुंचना कठिन हो सकता है।उन्होंने कहा कि कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरें सामने आने की बात कही जा रही है, लेकिन पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए सभी संबंधित लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है। उनके अनुसार यदि किसी को अनियमितताओं की जानकारी थी और उसने इसकी सूचना नहीं दी तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय होना चाहिए।

एसआईटी से बड़ी उम्मीदें

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि विशेष जांच दल के सामने कई जटिल प्रश्न हैं। उन्हें यह पता लगाना होगा कि कथित गड़बड़ियां कब से चल रही थीं, उनका दायरा कितना बड़ा था और किन लोगों की भूमिका इसमें रही।उन्होंने उम्मीद जताई कि एसआईटी निष्पक्ष और गहन जांच कर सच्चाई को सामने लाएगी। साथ ही उन्होंने जांच दल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनता और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए पूरे मामले का पारदर्शी निष्कर्ष निकलना बेहद आवश्यक है।