जल्द बाजार में दिख सकते हैं प्लास्टिक के नोट

आरबीआई भारत में पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इन नोटों पर कम खर्च आएगा, इनकी उम्र ज्यादा होगी और नकली नोटों पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। जल्द पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

जल्द बाजार में दिख सकते हैं प्लास्टिक के नोट

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 30 मई 2026

भारत में जल्द ही करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खबरों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक प्लास्टिक यानी पॉलिमर आधारित नोटों को चलन में लाने की तैयारी कर रहा है। अगर यह योजना लागू होती है तो देश में पहली बार बड़े स्तर पर प्लास्टिक नोट इस्तेमाल किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि आरबीआई की हालिया बोर्ड बैठकों में पॉलिमर नोटों को लेकर गंभीर चर्चा हुई है। इन नोटों को पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और कम लागत वाला माना जा रहा है।


क्या होते हैं पॉलिमर नोट

पॉलिमर नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं और जल्दी फटते या खराब नहीं होते। इन नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पानी, नमी और गंदगी से कम प्रभावित होते हैं। साथ ही इनमें नकली नोटों को रोकने के लिए आधुनिक सुरक्षा फीचर्स भी आसानी से जोड़े जा सकते हैं।


आरबीआई क्यों कर रहा है विचार

रिपोर्ट्स के अनुसार देश में नोटों की छपाई पर लगातार बढ़ता खर्च आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। वित्त वर्ष 2025 में नोटों की छपाई पर करीब 6,372 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। इसके अलावा हर साल करोड़ों पुराने और गंदे नोट वापस लेने पड़ते हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलिमर नोट खर्च कम करने का बड़ा विकल्प बन सकते हैं।


एटीएम में भी आसानी से होंगे इस्तेमाल

सूत्रों के अनुसार पॉलिमर नोटों को मौजूदा एटीएम सिस्टम के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि एटीएम मशीनों में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी और नोटों का वितरण सामान्य रूप से जारी रह सकेगा।


जल्द शुरू हो सकता है पायलट प्रोजेक्ट

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आरबीआई जल्द ही पॉलिमर नोटों के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। इस परियोजना के तहत कुछ क्षेत्रों में सीमित संख्या में प्लास्टिक नोट जारी कर उनकी उपयोगिता और व्यवहारिकता का परीक्षण किया जाएगा।


दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे कई देशों में पॉलिमर नोट पहले से उपयोग में हैं। इन देशों में प्लास्टिक नोटों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माना गया है, जिसके कारण उनका उपयोग लगातार बढ़ा है।


सिक्कों के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश जारी

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि आरबीआई सिक्कों के उपयोग को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। हालांकि उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले हैं, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में सिक्कों की आपूर्ति बढ़कर लगभग 1.5 अरब तक पहुंच गई है। अगर भारत में पॉलिमर नोट लागू होते हैं तो यह देश की मुद्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। लंबे समय तक चलने वाले नोटों से छपाई लागत कम होगी और नकली नोटों पर भी लगाम लग सकती है। हालांकि अंतिम फैसला आरबीआई और केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। फिलहाल देशभर की नजर इस संभावित बदलाव पर टिकी हुई है।