वायरल हुई कॉकरोच जनता पार्टी, अब संस्थापक ने लगाए खाते हैक होने के आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि उनके निजी और आधिकारिक सोशल मीडिया खाते हैक या बंद कर दिए गए हैं। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर नया विवाद शुरू हो गया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 मई 2026
सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अब नए विवाद में घिर गई है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि उनके निजी और आधिकारिक सोशल मीडिया खातों को हैक या बंद कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके डिजिटल अभियान को रोकने के लिए संगठित तरीके से कार्रवाई की जा रही है। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
इंस्टाग्राम से लेकर एक्स तक खाते प्रभावित होने का दावा
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए कहा कि उनका निजी इंस्टाग्राम खाता, पार्टी का आधिकारिक पेज और अन्य मंचों पर मौजूद खाते प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि एक्स मंच पर उनका खाता रोक दिया गया है जबकि बैकअप खाता भी हटा दिया गया है। दिपके ने लोगों से अपील की कि फिलहाल उनके नाम से किए जाने वाले किसी भी संदेश को आधिकारिक न माना जाए। उन्होंने दावा किया कि इस समय उनकी किसी भी मंच तक पहुंच नहीं बची है।
कुछ ही दिनों में करोड़ों लोगों तक पहुंचा अभियान
बताया जा रहा है कि अभिजीत दिपके ने करीब एक सप्ताह पहले इस व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान की शुरुआत की थी। देखते ही देखते यह अभियान युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया। सोशल मीडिया पर व्यंग्य, मीम्स और राजनीतिक कटाक्ष के जरिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने अलग पहचान बना ली। रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी के इंस्टाग्राम मंच पर करीब एक करोड़ नब्बे लाख से अधिक अनुयायी जुड़ चुके थे, जिसने इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
मुख्य न्यायाधीश की कथित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम उस विवाद के बाद सुर्खियों में आया जिसमें देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी को लेकर बहस शुरू हुई थी। वरिष्ठ वकील का दर्जा देने से जुड़ी सुनवाई के दौरान ‘परजीवी’ और ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल की चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इसके बाद इंटरनेट पर लोगों ने इस पूरे विवाद को लेकर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
युवाओं के मुद्दों को व्यंग्य के जरिए उठाया गया
इस डिजिटल अभियान में बेरोजगारी, परीक्षा पत्र लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की परेशानियों जैसे मुद्दों को अनोखे तरीके से उठाया गया। कॉकरोच को चुनाव चिन्ह बनाकर बनाए गए मीम्स और पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए गए। अभिजीत दिपके ने इस मंच को ‘आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज’ बताया था। यही वजह रही कि कम समय में यह अभियान युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गया।
धमकियां मिलने का भी किया दावा
अभिजीत दिपके ने इससे पहले दावा किया था कि अभियान के वायरल होने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलने लगी थीं। उन्होंने कुछ कथित संदेशों के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए आरोप लगाया था कि उन पर मंच बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है। दिपके के अनुसार कुछ लोगों ने उन्हें राजनीतिक दल में शामिल होने तक की सलाह दी थी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल मंचों की पारदर्शिता और राजनीतिक व्यंग्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक वर्ग इसे युवाओं की नाराजगी की आवाज बता रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि इस तरह के अभियानों से गंभीर संस्थाओं की छवि प्रभावित होती है। फिलहाल सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और अभिजीत दिपके लगातार चर्चा में बने हुए हैं।