उमर खालिद को अदालत से बड़ा झटका अंतरिम जमानत याचिका खारिज, दिल्ली दंगा मामले में नहीं मिली राहत
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद को कड़कड़डूमा अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने पारिवारिक कारणों और बीमार मां की देखभाल के लिए मांगी गई अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
दि राइजिंग न्यूज दिल्ली | 19 मई 2026
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में जेल में बंद आरोपी उमर खालिद को मंगलवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। उमर खालिद ने अपने दिवंगत मामा के चालीसवें दिन की रस्म में शामिल होने और बीमार मां की देखभाल के लिए पंद्रह दिन की अंतरिम जमानत की मांग की थी। लेकिन अदालत ने उनकी मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद एक बार फिर दिल्ली दंगा मामला चर्चा में आ गया है।
अदालत ने नहीं दी किसी तरह की राहत
कड़कड़डूमा अदालत में सुनवाई के दौरान उमर खालिद की ओर से मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत की मांग रखी गई थी। उनके वकीलों ने कहा कि परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है और उनकी मां की तबीयत भी खराब है। इसके अलावा परिवार में धार्मिक रस्म का आयोजन होना है, जिसमें उनकी मौजूदगी जरूरी बताई गई थी। हालांकि अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले के बाद उमर खालिद को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
दिल्ली दंगा मामले में पहले से जेल में बंद हैं उमर खालिद
उमर खालिद का नाम वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसक दंगों के मामले में सामने आया था। जांच एजेंसियों ने उन पर दंगा भड़काने और साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। तभी से वह जेल में बंद हैं और कई बार अदालत में जमानत की मांग कर चुके हैं। हालांकि अब तक उन्हें बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। दिल्ली दंगों में कई लोगों की मौत हुई थी और करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
सुरक्षा एजेंसियों ने जताई थी आपत्ति
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने अदालत में अंतरिम जमानत का विरोध किया था। एजेंसियों का कहना था कि मामला बेहद संवेदनशील है और आरोपी को राहत देना जांच और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी पर गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
दिल्ली दंगा मामला फिर बना राजनीतिक मुद्दा
उमर खालिद को राहत नहीं मिलने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ विपक्षी दल इसे मानवाधिकार और न्याय का मामला बता रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ कई संगठन अदालत के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। दिल्ली दंगा मामला पहले से ही देश की राजनीति और सामाजिक बहस का बड़ा विषय रहा है। ऐसे में अदालत के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
अदालत के फैसले के बाद बढ़ी कानूनी मुश्किलें
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत द्वारा अंतरिम जमानत खारिज किए जाने के बाद उमर खालिद की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अब उन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्च अदालत का रुख करना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल उनकी ओर से अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला फिर अदालत में पहुंच सकता है।
दिल्ली दंगों की सुनवाई पर देशभर की नजर
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामला पिछले कई वर्षों से देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। इस मामले से जुड़े हर फैसले पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की नजर बनी रहती है। अदालत की कार्रवाई और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट को लेकर लगातार बहस होती रही है। अब उमर खालिद की अंतरिम जमानत खारिज होने के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।