पाकिस्तान बॉर्डर के बाद अब पूर्वी सीमा की सुरक्षा पर बड़ा फोकस
पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग से मिली सफलता के बाद अब बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग लगाने की तैयारी तेज हो रही है। सेंसर, कैमरा, ड्रोन और एआई तकनीक से लैस यह प्रणाली घुसपैठ और तस्करी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 30 मई 2026
भारत की सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में अब बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग लगाने की मांग तेज हो गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग ने घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाई, उसी तरह बांग्लादेश सीमा पर भी आधुनिक तकनीक आधारित स्मार्ट फेंसिंग समय की जरूरत बन चुकी है। बांग्लादेश से लगती भारत की लंबी सीमा आज भी कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है। अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दे रही है।
पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग से मिला बड़ा फायदा
भारत और पाकिस्तान के बीच लगभग 3323 किलोमीटर लंबी सीमा है। 1990 और 2000 के दशक में इस सीमा के जरिए घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों की घटनाएं आम थीं। इसके बाद सीमा सुरक्षा बल की निगरानी में बड़े पैमाने पर फेंसिंग का काम किया गया। ऊंची बाड़, कैमरे, लाइटिंग और लगातार पेट्रोलिंग के कारण घुसपैठ की घटनाओं में भारी कमी दर्ज की गई। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग का सकारात्मक असर साफ दिखाई दिया है।
बांग्लादेश सीमा क्यों बनी चुनौती
भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे लंबी स्थलीय सीमाओं में शामिल है। यह सीमा पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर गुजरती है। यहां नदियां, दलदली इलाके और घने जंगल बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इसी वजह से पारंपरिक तारबाड़ हर जगह लगाना संभव नहीं हो पाता।
स्मार्ट फेंसिंग क्या है
स्मार्ट फेंसिंग एक आधुनिक सुरक्षा प्रणाली है जिसमें पारंपरिक बाड़ के साथ सेंसर, सीसीटीवी कैमरे, इंफ्रारेड डिटेक्टर, ड्रोन निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल टाइम अलर्ट सिस्टम को जोड़ा जाता है। यह तकनीक रात में भी संदिग्ध गतिविधियों का पता लगा सकती है और तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना भेजती है।
सीमा सुरक्षा में तकनीक की बड़ी भूमिका
स्मार्ट फेंसिंग में मोशन सेंसर, फाइबर ऑप्टिक सेंसर, थर्मल कैमरे और एआई आधारित निगरानी सिस्टम शामिल होते हैं। यह सिस्टम इंसान, जानवर और वाहनों की गतिविधियों को अलग-अलग पहचान सकता है। इससे फर्जी अलर्ट कम होते हैं और सुरक्षा बलों को तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
सरकार चला रही पायलट प्रोजेक्ट
भारत सरकार ने कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम के तहत कई सीमावर्ती इलाकों में स्मार्ट फेंसिंग के पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। सरकार की योजना आने वाले समय में इस तकनीक को बांग्लादेश सीमा के बड़े हिस्से तक विस्तार देने की है।
क्या होंगे फायदे
स्मार्ट फेंसिंग से 24 घंटे निगरानी संभव होगी। कम जवानों के साथ ज्यादा क्षेत्र को कवर किया जा सकेगा। तस्करी, अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण मिल सकता है। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियों को बेहतर डेटा और खुफिया जानकारी भी प्राप्त होगी।
पाकिस्तान सीमा पर फेंसिंग की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत सीमा सुरक्षा देश की आंतरिक सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है। बांग्लादेश सीमा की भौगोलिक चुनौतियां पारंपरिक बाड़ को सीमित करती हैं, इसलिए स्मार्ट फेंसिंग एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो पूर्वी सीमा पर घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर बड़ी रोक लग सकती है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।