चुनावी आंधी से अंधे नहीं हो सकते…”: बंगाल SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
दि राइजिंग न्यूज। 13 अप्रैल 2026 ।
चुनावी आंधी से अंधे नहीं हो सकते…”: बंगाल SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे SIR (Special Intensive Revision) विवाद ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए साफ कहा कि चुनावी माहौल के दबाव में आकर संवैधानिक अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने संकेत दिया कि “हम आने वाले चुनाव की आंधी से अंधे नहीं हो सकते”, यानी चुनावी जल्दबाज़ी के चलते मतदाताओं के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विवाद चल रहा है।
लाखों नाम हटने से बढ़ा विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक SIR प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में लगभग 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिससे राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि करीब 60 लाख मामलों में आपत्तियां और दावे दाखिल हुए, जिनमें से बड़ी संख्या अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है।
इसके अलावा, अदालत में यह भी सामने आया कि समीक्षा के बाद भी करीब 55% लोग अभी तक वोटर सूची से बाहर हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
वोट डालना एक मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार है
किसी भी नागरिक को गलत तरीके से बाहर करना स्वीकार नहीं होगा
सभी मामलों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है
पहले भी कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई थी और एक घटना को “लॉ एंड ऑर्डर का ब्रेकडाउन” तक बताया था।
हाईकोर्ट को भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे विवाद को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह तीन जजों की विशेष पीठ बनाए, जो SIR से जुड़े मामलों की निगरानी करे और तेजी से फैसले सुनिश्चित करे।
राजनीतिक माहौल गरम
इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। जहां एक तरफ इसे चुनावी हेरफेर बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया कहा जा रहा है।