दुनिया के लिए मोदी का एआई संदेश

फ्रांस के पेरिस में आयोजित वीवाटेक 2026 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीक को सभी के लिए सुलभ बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत के लिए एआई का अर्थ ‘ऑल इन्क्लूसिव’ है और तकनीक का लाभ दुनिया के हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

दुनिया के लिए मोदी का एआई संदेश

दि राइजिंग न्यूज़ | पेरिस | 19 जून 2026

एआई पर दुनिया को भारत का संदेश

फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित वीवाटेक 2026 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को लेकर भारत का दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और वह कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित न रह जाए। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए एआई का अर्थ केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं बल्कि ‘ऑल इन्क्लूसिव’ भी है। उनका कहना था कि ऐसी तकनीक का विकास होना चाहिए जो दुनिया के हर व्यक्ति के लिए उपयोगी और सुलभ हो।

तकनीक पर सबका अधिकार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नवाचार और तकनीकी विकास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि लोगों को उन तकनीकों तक समान पहुंच मिले। यदि अत्याधुनिक तकनीक केवल चुनिंदा देशों या बड़ी कंपनियों के हाथों में सीमित हो जाती है तो वैश्विक विकास का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक मानव जीवन को बेहतर बनाने, विकास को गति देने और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने का माध्यम बननी चाहिए।

भारत की डिजिटल ताकत का जिक्र

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया के कुल डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है, जो देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने तकनीक को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे गांवों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। इसी वजह से करोड़ों लोग डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

वैश्विक एआई पहुंच पर बढ़ी बहस

प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में उन्नत एआई तकनीकों तक पहुंच को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने कुछ अत्याधुनिक एआई मॉडल विदेशी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराने का फैसला लिया था। इस फैसले के बाद तकनीकी क्षेत्र में यह बहस तेज हुई कि भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीकों तक पहुंच सीमित की जानी चाहिए या उन्हें व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इसी संदर्भ में तकनीक के लोकतंत्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

डिजिटल पहचान और भुगतान में भारत अग्रणी

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पहचान तंत्र और सबसे बड़े डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में से एक भारत में संचालित हो रहा है। इन प्रणालियों का उपयोग वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सरकारी योजनाओं के वितरण में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ढांचे ने करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्टार्टअप क्षेत्र की उपलब्धियां

वीवाटेक सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और भारत दुनिया के सबसे बड़े नवाचार केंद्रों में से एक बनकर उभरा है।  उन्होंने कहा कि भारतीय युवा नई तकनीकों और अभिनव समाधानों के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

उभरती तकनीकों में भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में प्रदर्शित भारतीय तकनीकी नवाचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत में त्रि-आयामी मुद्रित रॉकेट इंजन, आनुवंशिक चिकित्सा, कैंसर की पहचान करने वाले एआई उपकरण, साइबर सुरक्षा समाधान, रोबोटिक्स और स्मार्ट सिटी तकनीकों पर तेजी से काम हो रहा है। इन क्षेत्रों में हो रहे शोध और विकास को भारत की तकनीकी क्षमता और नवाचार की शक्ति का प्रतीक बताया गया।

निवेश और उद्योग को प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एक खुला और अवसरों से भरपूर समाज है, जहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सरकार उद्योग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नियमों को सरल बना रही है तथा निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 50 अरब डॉलर से अधिक के प्रोत्साहन कार्यक्रमों पर काम कर रही है। साथ ही भारत दुनिया में सबसे सस्ता डेटा और प्रतिस्पर्धी दरों पर हरित ऊर्जा उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है।

वैश्विक सहयोग पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान केवल वैश्विक सहयोग और साझा नवाचार के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने दुनिया भर के निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्यमियों को भारत के साथ मिलकर काम करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि तकनीक को सभी के लिए उपलब्ध बनाया जाए और उसका उपयोग मानव कल्याण के लिए किया जाए तो आने वाले वर्षों में दुनिया अधिक समावेशी, सुरक्षित और समृद्ध बन सकती है।