1 अगस्त 2025 से UPI के नए नियम: जानिए क्या बदल जाएगा
दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 30 मई, 2025 । नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के इस्तेमाल को और सुरक्षित, स्थिर और विश्वसनीय बनाने के लिए 1 अगस्त 2025 से कई नए नियम लागू करने का ऐलान किया है। इन बदलावों का सीधा असर करोड़ों UPI यूजर्स, बैंकों और पेमेंट ऐप्स (जैसे Paytm, PhonePe, Google Pay) पर पड़ेगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि ये नियम क्या हैं, क्यों लाए गए हैं और आम यूजर पर इनका क्या असर होगा।
दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली। 30 मई, 2025 ।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के इस्तेमाल को और सुरक्षित, स्थिर और विश्वसनीय बनाने के लिए 1 अगस्त 2025 से कई नए नियम लागू करने का ऐलान किया है। इन बदलावों का सीधा असर करोड़ों UPI यूजर्स, बैंकों और पेमेंट ऐप्स (जैसे Paytm, PhonePe, Google Pay) पर पड़ेगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि ये नियम क्या हैं, क्यों लाए गए हैं और आम यूजर पर इनका क्या असर होगा।
क्यों लाए गए ये नए नियम?
बीते कुछ महीनों में UPI नेटवर्क पर बार-बार आउटेज, ट्रांजैक्शन फेल्योर और सर्वर ओवरलोड जैसी समस्याएं सामने आई हैं। NPCI के मुताबिक, बार-बार बैलेंस चेक, ऑटोपे, ट्रांजैक्शन स्टेटस जैसी नॉन-फाइनेंशियल रिक्वेस्ट्स की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ा और सेवा में बाधा आई। नए नियमों का मकसद सिस्टम को स्थिर बनाना और सभी यूजर्स को निर्बाध सेवा देना है।
नए नियमों की मुख्य बातें
| नियम | विवरण |
|---|---|
| बैलेंस चेक लिमिट | हर UPI ऐप पर एक दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक किया जा सकेगा। |
| लिंक्ड अकाउंट लिस्ट | एक दिन में 25 बार ही लिंक्ड बैंक अकाउंट्स की लिस्ट देख पाएंगे। |
| ऑटोपे (AutoPay) की समय सीमा | ऑटोपे (जैसे सब्सक्रिप्शन, EMI, SIP) का भुगतान केवल नॉन-पीक आवर्स (सुबह 10-1 बजे और शाम 5-9:30 बजे को छोड़कर) में ही होगा। |
| ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक | ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक करने के लिए कम-से-कम 90 सेकंड का गैप रखना होगा और हर 2 घंटे में अधिकतम 3 बार ही चेक किया जा सकेगा। |
| API मॉनिटरिंग और पेनल्टी | सभी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSP) को API (Application Programming Interface) यूसेज मॉनिटर करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पेनल्टी, API ब्लॉक या नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लग सकती है। |
| रियल टाइम बैलेंस अपडेट | हर सफल ट्रांजैक्शन के बाद बैंक खुद ही बैलेंस की जानकारी भेजेगा। |
| सिस्टम ऑडिट | सभी PSPs और बैंकों को 31 अगस्त 2025 तक सिस्टम ऑडिट रिपोर्ट NPCI को भेजनी होगी। |
पीक और नॉन-पीक आवर्स क्या हैं?
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पीक आवर्स: सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे और शाम 5 बजे से रात 9:30 बजे तक।
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नॉन-पीक आवर्स: उपरोक्त समय के अलावा बाकी समय।
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ऑटोपे ट्रांजैक्शन केवल नॉन-पीक आवर्स में प्रोसेस होंगे, ताकि पीक टाइम में सिस्टम पर लोड कम रहे।
इन बदलावों का असर किस पर?
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आम यूजर: रोजमर्रा के लेन-देन पर मामूली असर, लेकिन बार-बार बैलेंस चेक या स्टेटस देखने की आदत वालों को लिमिट का ध्यान रखना होगा।
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व्यापारी/फ्रीलांसर: बार-बार ऑटोपे या ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक करने वालों को समय और सीमा का ध्यान रखना जरूरी होगा।
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बैंक और ऐप्स: सभी को सिस्टम ऑडिट, API मॉनिटरिंग और NPCI के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा, वरना पेनल्टी या नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लग सकती है।
NPCI का उद्देश्य
NPCI का कहना है कि इन नियमों से UPI सिस्टम की विश्वसनीयता, सुरक्षा और स्थिरता बढ़ेगी। इससे सर्वर डाउन, ट्रांजैक्शन फेल्योर जैसी समस्याएं कम होंगी और सभी यूजर्स को बेहतर अनुभव मिलेगा।
निष्कर्ष
1 अगस्त 2025 से UPI यूजर्स को बैलेंस चेक, ऑटोपे, ट्रांजैक्शन स्टेटस जैसी सेवाओं के लिए निश्चित सीमा का पालन करना होगा। ये बदलाव सिस्टम को सुरक्षित, स्थिर और सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध रखने के लिए जरूरी हैं। बैंक और ऐप्स को भी इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, अन्यथा उन पर कार्रवाई हो सकती है।