दिल्ली कोर्ट में महिला जज से दोषी बोला - 'बाहर मिल, जिंदा नहीं लौटेगी'

दि राइजिंग न्यूज।  नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2025: दिल्ली की एक अदालत में उस समय सनसनी फैल गई जब एक आरोपी और उसके वकील ने एक महिला न्यायाधीश को खुले कोर्ट में धमकी दी। मामला सेक्शन 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 के तहत दर्ज हुआ था, जिसमें Vintage Credit and Leasing Pvt. Ltd. की ओर से राज सिंह के खिलाफ शिकायत की गई थी।

दिल्ली कोर्ट में महिला जज से  दोषी बोला - 'बाहर मिल, जिंदा नहीं लौटेगी'
  • वकील को कोर्ट का नोटिस, अवमानना पर जवाब तलब
  • जज का बयान – 'न्याय के लिए डटी रहूंगी'

दि राइजिंग न्यूज। 

नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2025:
दिल्ली की एक अदालत में उस समय सनसनी फैल गई जब एक आरोपी और उसके वकील ने एक महिला न्यायाधीश को खुले कोर्ट में धमकी दी। मामला सेक्शन 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 के तहत दर्ज हुआ था, जिसमें Vintage Credit and Leasing Pvt. Ltd. की ओर से राज सिंह के खिलाफ शिकायत की गई थी।

यह केस पिछले पांच वर्षों से लंबित था और 2 अप्रैल 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (NI एक्ट)-05, शिवांगी मंगला ने फैसला सुनाते हुए आरोपी राज सिंह को दोषी ठहराया।

कोर्ट में धमकी और अभद्रता

फैसले के तुरंत बाद, आरोपी राज सिंह ने कोर्टरूम में अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया। न्यायाधीश के आदेश के अनुसार, आरोपी ने न केवल अपशब्द कहे बल्कि उनकी मां को लेकर भी अभद्र टिप्पणियां कीं। इतना ही नहीं, उसने जज की ओर कोई वस्तु फेंकने की भी कोशिश की और अपने वकील अतुल कुमार से कहा कि “कोई भी तरीका अपनाओ, फैसला मेरे पक्ष में कराओ।”

न्यायाधीश के अनुसार, आरोपी और उसके वकील दोनों ने धमकी दी और कहा:

"तू है क्या चीज़... बाहर मिल, देखते हैं कैसे ज़िंदा घर जाती है..."

इसके अलावा, दोनों ने जज पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया और कहा कि अगर फैसला नहीं बदला गया तो फर्जी शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी।

न्यायाधीश ने आदेश में लिखा:

“फिर भी, मैं सभी खतरों के बावजूद न्याय के पक्ष में डटी हूं और न्यायोचित कार्य करती रहूंगी।”

कानूनी कार्रवाई के निर्देश

इस गंभीर दुर्व्यवहार को देखते हुए, अदालत ने आरोपी के वकील अतुल कुमार को नोटिस जारी कर उनसे लिखित में जवाब मांगा है कि क्यों उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू न की जाए। साथ ही, आरोपी को सीआरपीसी की धारा 437A के तहत जमानती बॉन्ड भरने का आदेश भी दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, न्यायाधीश ने राष्ट्रीय महिला आयोग, दिल्ली के समक्ष इस पूरे प्रकरण की जानकारी देने की भी बात कही है, ताकि आरोपी और वकील के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

आरोपी के खिलाफ यह हुआ था आदेश