आवारा कुत्तों पर सख्त हुआ सर्वोच्च न्यायालय, खतरनाक और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को मारने पर विचार के निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और रेबीज के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों को फटकार लगाई है। अदालत ने गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार करने की बात भी कही है।
दि राइजिंग न्यूज | 19 मई 2026
आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सर्वोच्च न्यायालय सख्त
देशभर में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के मामलों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने कहा कि उसके पहले दिए गए आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसे वह गंभीरता से देख रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और लोगों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। इसी के साथ न्यायालय ने गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर भी विचार करने की बात कही है।
राज्यों की लापरवाही पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। न्यायालय ने कहा कि यदि पशु जन्म नियंत्रण नियमों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। अदालत ने अपने सात नवंबर दो हजार पच्चीस के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकतर राज्यों ने निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। न्यायालय ने यहां तक कहा कि इस लापरवाही को अवमानना की तरह देखा जाएगा।
बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों को बताया चिंता का विषय
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि देशभर में छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सीधे तौर पर लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। न्यायालय ने यह भी कहा कि कई शहरों से बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। अदालत ने इस स्थिति को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बताया।
देशभर के कई शहरों का अदालत ने किया जिक्र
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा जैसे शहरों का विशेष रूप से उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि इन क्षेत्रों से डॉग बाइट के बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। तमिलनाडु समेत कई अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। न्यायालय ने दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्लेख करते हुए बताया कि वहां जनवरी से अब तक इकतीस लोगों को कुत्तों ने काटा है, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिए कई महत्वपूर्ण निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और संबंधित एजेंसियों को कई अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि हर शहर में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र बनाए जाएं और वहां प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। रेबीज विरोधी टीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएं ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को भी निर्देश दिए गए कि वह सड़कों और राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए। अदालत ने गौशालाओं के निर्माण और पशुओं को वहां भेजने पर भी जोर दिया।
अधिकारियों को काम करने देने का निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि जो अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन कराने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं, उन्हें बिना बाधा अपना काम करने दिया जाए। अदालत ने कहा कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ केवल अपरिहार्य स्थिति में ही कोई सुनवाई होनी चाहिए। न्यायालय का मानना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए तो आवारा कुत्तों और पशुओं की समस्या पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है।
फिलहाल बंद हुई सुनवाई, नवंबर में मांगी जाएगी रिपोर्ट
अदालत ने फिलहाल इस मामले की नियमित सुनवाई बंद कर दी है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सत्रह नवंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी। न्यायालय यह देखेगा कि उसके आदेशों का पालन किस स्तर तक किया गया है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों और सरकारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जा सकता है।