भारत-बांग्लादेश रिश्तों के बीच बढ़ी हलचल...

बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने कहा है कि तीस्ता परियोजना पर निर्णय लेना बांग्लादेश का अधिकार है और देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार आगे बढ़ेगा। उन्होंने भारत के साथ भरोसे और सम्मान पर आधारित संबंधों की वकालत करते हुए हल्के अंदाज में कहा कि यदि कोई नाराज होगा तो उसे राजशाही के आम भेज दिए जाएंगे। इस बीच चीन के साथ बढ़ते सहयोग और तीस्ता परियोजना को लेकर भारत की रणनीतिक चिंताएं भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों के बीच बढ़ी हलचल...

दि राइजिंग न्यूज़ | ढाका | 2 जुलाई 2026

भारत और बांग्लादेश के संबंधों के बीच एक बार फिर तीस्ता नदी परियोजना चर्चा का केंद्र बन गई है। बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भारत के साथ रिश्तों और तीस्ता परियोजना को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ भरोसे, समानता और आपसी सम्मान पर आधारित संबंध चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़े किसी भी निर्णय का अधिकार केवल बांग्लादेश के पास है।शफीकुर रहमान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तीस्ता नदी से जुड़ी योजना पूरी तरह बांग्लादेश का आंतरिक विषय है और इस पर किसी दूसरे देश को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार देश के विकास और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय लेगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश की सरकार तीस्ता परियोजना को लेकर चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।


भारत के साथ रिश्तों पर क्या बोले शफीकुर रहमान

ढाका स्थित संसद भवन में बातचीत के दौरान शफीकुर रहमान ने कहा कि भारत बांग्लादेश का सबसे निकटतम पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध दोनों की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश केवल भारत ही नहीं, बल्कि अपने सभी पड़ोसी देशों का सम्मान करता है और बदले में समान व्यवहार, विश्वास तथा पारस्परिक सम्मान की अपेक्षा करता है।उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ स्वस्थ और स्थायी संबंध तभी संभव हैं, जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों का सम्मान करें। उनका कहना था कि बांग्लादेश भविष्य में भी भारत के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है, लेकिन किसी भी राष्ट्रीय परियोजना पर निर्णय लेने का अधिकार केवल बांग्लादेश का है।


तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश का स्पष्ट रुख

तीस्ता नदी परियोजना को लेकर शफीकुर रहमान ने कहा कि यह पूरी तरह बांग्लादेश का घरेलू विषय है और सरकार इस पर अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस परियोजना का समर्थन करती है क्योंकि इससे देश के उत्तरी क्षेत्रों में सिंचाई, जल प्रबंधन और विकास कार्यों को गति मिलेगी।उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना का उद्देश्य किसी दूसरे देश को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इसलिए इस परियोजना को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है।


अगर कोई नाराज होगा तो आम भेज देंगे

शफीकुर रहमान ने अपने बयान के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि तीस्ता परियोजना को लेकर कोई देश नाराज होता है तो उसे मनाने के लिए बांग्लादेश राजशाही के प्रसिद्ध आम भेज देगा। उन्होंने कहा कि उनके देश का उद्देश्य किसी को नाराज करना नहीं है, बल्कि अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करना है।उनका यह बयान राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मजाक अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसलों पर बांग्लादेश किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।


चीन के साथ बढ़ रहा है सहयोग

शफीकुर रहमान का बयान ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश की सरकार तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना को लेकर चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान भी इस परियोजना को लेकर दोनों देशों के बीच संभावित सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई थी।बताया जा रहा है कि चीन इस परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहयोग देने में रुचि दिखा रहा है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति और रणनीतिक समीकरणों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।


भारत क्यों जता रहा है चिंता

तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। इस नदी के जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कई वर्षों से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।भारत की चिंता इसलिए भी अधिक है क्योंकि प्रस्तावित परियोजना सिलीगुड़ी गलियारे के निकट स्थित है। यह इलाका भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग माना जाता है। किसी भी बड़े विदेशी निवेश या निर्माण गतिविधि को भारत अपनी सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानता है।


शेख हसीना के बाद बदली परियोजना की दिशा

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में तीस्ता परियोजना को लेकर भारत के साथ मिलकर समाधान निकालने की कोशिशें की जा रही थीं। उस समय दोनों देशों के बीच जल बंटवारे और विकास परियोजनाओं को लेकर लगातार संवाद होता रहा।हालांकि वर्ष 2024 में राजनीतिक बदलाव के बाद पहले अंतरिम सरकार और अब प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार ने इस परियोजना में चीन के साथ सहयोग बढ़ाने पर अधिक जोर दिया है। यही कारण है कि तीस्ता परियोजना अब केवल जल प्रबंधन का विषय नहीं रह गई, बल्कि यह भारत, बांग्लादेश और चीन के बीच सामरिक और कूटनीतिक महत्व का मुद्दा भी बन चुकी है।


भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या होगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि तीस्ता परियोजना आने वाले समय में भारत और बांग्लादेश के संबंधों की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकती है। यदि दोनों देश आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान निकालते हैं तो क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी, लेकिन यदि मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।फिलहाल बांग्लादेश ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा, जबकि भारत इस परियोजना के सामरिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर लगातार नजर बनाए हुए है।