परिसीमन और महिला आरक्षण पर फिर बढ़ी सियासत
संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बदलते राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों में उथल-पुथल के बीच मॉनसून सत्र में इन विधेयकों की वापसी की चर्चाएं तेज हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 11 जून 2026
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार केंद्र सरकार आगामी मॉनसून सत्र में इन विधेयकों को दोबारा संसद में पेश करने पर विचार कर सकती है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण इन प्रस्तावों को लेकर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सरकार को पहले संसद में बड़ा झटका लगा था। आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सके थे। उस समय कई क्षेत्रीय दलों ने इन प्रस्तावों का विरोध किया था और विपक्षी एकजुटता ने सरकार की राह कठिन बना दी थी।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की राजनीति में हुए बदलावों के बाद अब संसद का गणित भी बदलता दिखाई दे रहा है। कुछ क्षेत्रीय दलों के भीतर असंतोष और राजनीतिक पुनर्संरचना की चर्चाओं ने नए समीकरणों को जन्म दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों का असर संसद में होने वाली वोटिंग पर भी पड़ सकता है।
महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को परिसीमन से जोड़ा गया था। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के बाद महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था लागू की जानी थी। इसी कारण दोनों विधेयक राजनीतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए माने जा रहे हैं।
आगामी राज्यसभा चुनावों और संभावित राजनीतिक फेरबदल पर भी सभी दलों की नजर है। विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों के बाद उच्च सदन की संख्या में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इससे भविष्य में संवैधानिक संशोधन से जुड़े विधेयकों के समर्थन और विरोध का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
कुछ क्षेत्रीय दलों के सांसदों के अलग रुख अपनाने और आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच लोकसभा में भी राजनीतिक स्थिति पहले जैसी नहीं रही है। विभिन्न दलों के भीतर चल रही गतिविधियों पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों नजर बनाए हुए हैं।
अब राजनीतिक गलियारों की नजर आगामी मॉनसून सत्र पर टिकी हुई है। यदि सरकार इन विधेयकों को दोबारा पेश करती है तो संसद में एक बार फिर जोरदार बहस और संख्या बल की परीक्षा देखने को मिल सकती है। महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख विषयों में शामिल रहने की संभावना है।
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