होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से दहला शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी भारी गिरावट के साथ खुले
ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशकों की चिंता बढ़ गई। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 8 मई 2026 ।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव और कथित गोलीबारी की घटनाओं ने वैश्विक निवेशकों में डर पैदा कर दिया है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहां सुबह की शुरुआत लाल निशान के साथ हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना सकती हैं।
गिरावट के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार
शुक्रवार सुबह बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब २१२ अंकों की गिरावट के साथ ७७,६३१ के स्तर पर खुला। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी भी लगभग ९३ अंकों की कमजोरी के साथ २४,२३३ के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, वाहन, धातु और ऊर्जा क्षेत्र के कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।
क्यों टूटा बाजार
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है और दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने तथा गोलीबारी की खबरों ने यह आशंका पैदा कर दी है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम जनता पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल १०२ डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि पश्चिम टेक्सास कच्चे तेल में भी दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहा तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर परिवहन, उद्योग और खाद्य वस्तुओं तक पर दिखाई दे सकता है। बढ़ती तेल कीमतें सरकार और आम जनता दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
एशियाई बाजारों में भी मचा हड़कंप
केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के कई बड़े बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक लगभग १.८८ प्रतिशत तक टूट गया, जबकि जापान और हांगकांग के बाजारों में भी कमजोरी बनी रही। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी बाजार भी दबाव में
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों को डर है कि तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई दोबारा बढ़ सकती है। अमेरिका के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई और ऊर्जा संकट की आशंका ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर आने वाले दिनों में निवेश और व्यापार गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, वाहन, विमानन और परिवहन क्षेत्रों पर पड़ सकता है। बढ़ती अनिश्चितता के कारण बैंकिंग शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है। कच्चा तेल महंगा होने से वाहन उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि विमानन कंपनियों की लागत में भी इजाफा होने की आशंका है। परिवहन खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं, जिसका असर आम जनता पर दिखाई देगा।
आम लोगों पर क्या होगा असर
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका असर परिवहन खर्च, खाद्य वस्तुओं की कीमतों और घरेलू बजट पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि की रणनीति अपनाने और सुरक्षित निवेश विकल्पों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।