ईरान युद्ध सीजफायर के बाद पाकिस्तान में सियासत गर्म: PM को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग

ईरान युद्ध सीजफायर के बाद पाकिस्तान में सियासत गर्म: PM को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग

ईरान युद्ध सीजफायर के बाद पाकिस्तान में सियासत गर्म: PM को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हाल ही में हुए सीजफायर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इस युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर अब देश के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश कर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग उठी है।

दरअसल, 2026 के ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान हालात बेहद गंभीर हो गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आखिरी समय तक बातचीत लगभग टूट चुकी थी, लेकिन पाकिस्तान ने सक्रिय कूटनीति के जरिए दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई। 

इसी भूमिका को आधार बनाते हुए पंजाब विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उप प्रधानमंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की मांग की गई है। प्रस्ताव पेश करने वाले विधायक ने कहा कि इन नेताओं की कूटनीतिक कोशिशों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में बड़ा योगदान दिया है। 

कुछ नेताओं ने तो यह भी मांग की कि सेना प्रमुख को भी इस सम्मान के लिए नामांकित किया जाए, क्योंकि उन्होंने पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाई। 

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर विवाद भी खड़ा हो गया है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि सीजफायर को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर फिलहाल अस्थायी है और कई बड़े मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, जैसे परमाणु कार्यक्रम, स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ और क्षेत्रीय सुरक्षा। 

फिलहाल, पाकिस्तान इस कूटनीतिक सफलता को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है, जबकि विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी वास्तविक प्रभावशीलता पर बहस जारी है। आने वाले दिनों में होने वाली शांति वार्ताएं तय करेंगी कि यह सीजफायर स्थायी शांति में बदल पाता है या नहीं।