मुश्किल वक्त में पार्टी छोड़ना विश्वासघात

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें गद्दार करार दिया है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में पार्टी का साथ छोड़ना बीमार मां को छोड़ने जैसा है। ममता ने आरोप लगाया कि कई नेता अपने खिलाफ चल रहे मामलों और संपत्ति बचाने के लिए दल बदल रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और आगामी शहीद दिवस रैली को सफल बनाने का आह्वान किया।

मुश्किल वक्त में पार्टी छोड़ना विश्वासघात

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 27 जून 2026

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें गद्दार बताया है। उन्होंने कहा कि जिस संगठन ने किसी व्यक्ति को पहचान, सम्मान और राजनीतिक मंच दिया हो, उसे कठिन समय में छोड़ देना सबसे बड़ा विश्वासघात है। ममता ने पार्टी छोड़ने की तुलना बीमार मां का साथ छोड़ने से करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।

बागियों पर ममता का सीधा हमला

उत्तर कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस की एक वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने हाल के दिनों में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं, विधायकों, सांसदों और पार्षदों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब कोई मां अपने बच्चों का पूरी जिंदगी पालन-पोषण करती है और बाद में बीमार हो जाती है, तब उसका साथ छोड़ देना नैतिक रूप से गलत है। उसी तरह जिस पार्टी ने नेताओं को राजनीतिक पहचान दी, उसे संकट के समय छोड़ना विश्वासघात है।उन्होंने कहा कि ऐसे नेता आज भले ही खुद को सुरक्षित समझ रहे हों, लेकिन भविष्य में जनता और पार्टी कार्यकर्ता उनसे जवाब मांगेंगे।

केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल को भय और आर्थिक संकट से भरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों और नेताओं को निशाना बना रही है।ममता ने कहा कि विभिन्न मामलों में लगातार मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और लोगों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई लोग भय और आर्थिक परेशानियों के कारण गंभीर मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि फुटपाथ दुकानदारों पर कार्रवाई और रोजगार के अवसरों में कमी से आम लोगों की समस्याएं बढ़ी हैं।

कार्यकर्ताओं के संघर्ष का किया जिक्र

टीएमसी प्रमुख ने कहा कि पार्टी की ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी संगठन को मजबूत बनाए रखा। उन्होंने कहा कि आज जो नेता बड़े पदों पर पहुंचे हैं, उनकी सफलता के पीछे कार्यकर्ताओं की मेहनत, संघर्ष और बलिदान है।ममता ने कहा कि पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े लोगों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी तृणमूल कांग्रेस का झंडा बुलंद रखा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और संगठन को मजबूत करने की अपील की।

भाजपा में जाने वालों पर साधा निशाना

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ नेता अपने खिलाफ चल रहे मामलों और परिवार की संपत्ति बचाने के लिए भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों में संघर्ष करने का धैर्य नहीं है और वे व्यक्तिगत हितों को संगठन से ऊपर रख रहे हैं।उन्होंने कहा कि कुछ नेता दावा करते हैं कि वे कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि वे अपने निजी हितों की रक्षा के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों ने अपने राजनीतिक सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किया है।

वापसी का भी दिया संदेश

अपने संबोधन के दौरान ममता ने संकेत दिया कि जिन लोगों में अभी भी समझ और आत्ममंथन की क्षमता है, वे वापस लौट सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि दल बदलकर वे राजनीतिक रूप से सुरक्षित हो जाएंगे, उन्हें भविष्य में निराशा का सामना करना पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि ऐसे नेता अंततः किसी भी पक्ष में सम्मानजनक स्थिति नहीं बना पाएंगे और राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ सकते हैं।

पुलिस और मीडिया पर भी उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने पुलिस और मीडिया की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों को सभाओं और कार्यक्रमों के आयोजन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर सरकार की आलोचना करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। ममता ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए और किसी भी प्रकार के दबाव का विरोध किया जाना चाहिए।

परिवार और अभिषेक बनर्जी का किया जिक्र

अपने भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वासघात को लेकर उनका रुख हमेशा सख्त रहा है। साथ ही उन्होंने अपने भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के परिवार को कठिन समय में साथ खड़ा रहने वाला बताया।उन्होंने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को विभिन्न जांच एजेंसियों की ओर से लगातार नोटिस मिलते रहे हैं और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाती है।

शहीद दिवस रैली को सफल बनाने की अपील

भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को आयोजित होने वाली तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली को सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह रैली पार्टी के लिए भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।ममता ने कहा कि चाहे कम संख्या में कार्यकर्ता आएं, फिर भी रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे एकजुट रहें और संगठन को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करें।

राजनीतिक माहौल में बढ़ा महत्व

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में दल-बदल की घटनाएं लगातार चर्चा में हैं। कई नेताओं के भाजपा में शामिल होने और विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच टीएमसी नेतृत्व संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से पहले दिया गया यह संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठनात्मक एकता को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।