मध्य-पूर्व युद्ध से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट, IEA ने जताई बड़ी चिंता

मध्य-पूर्व युद्ध से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट, IEA ने जताई बड़ी चिंता

मध्य-पूर्व युद्ध से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट, IEA ने जताई बड़ी चिंता

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार इस संघर्ष के कारण दुनिया के तेल बाजार में अब तक का सबसे बड़ा आपूर्ति व्यवधान पैदा हो गया है। एजेंसी का कहना है कि मार्च महीने में वैश्विक तेल आपूर्ति लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन (8 मिलियन बैरल) तक कम हो सकती है, जो दुनिया की कुल मांग का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा है।

रिपोर्ट के अनुसार इस संकट की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ा तनाव है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से हर साल करोड़ों बैरल कच्चा तेल गुजरता है। युद्ध के कारण इस रास्ते से तेल की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को उत्पादन कम करना पड़ा है। 

ऊर्जा बाजार में इस व्यवधान का असर तेल की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है तो कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ेगा।

स्थिति को संभालने के लिए IEA के सदस्य देशों ने बाजार को स्थिर करने के उद्देश्य से अपने रणनीतिक भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का निर्णय लिया है। यह अब तक का सबसे बड़ा आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का फैसला माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि मध्य-पूर्व में संघर्ष जारी रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।