पहलगाम हमले में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान से खरीदे गए मोबाइल फोन आतंकियों के पास मिले

पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन पाकिस्तान से खरीदे गए मिले हैं। जांच में पता चला कि ये फोन वर्षों तक बंद रहे और हमले के दौरान सक्रिय किए गए थे, जिससे सीमा पार साजिश के संकेत मिले हैं।

पहलगाम हमले में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान से खरीदे गए मोबाइल फोन आतंकियों के पास मिले

दि राइजिंग न्यूज़ | श्रीनगर | 1 जून 2026

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में वर्ष 2025 में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को एक ऐसा सुराग मिला है, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त जांच में सामने आया है कि हमले में शामिल आतंकियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे। जांच में यह भी पता चला है कि इन मोबाइल फोन को खरीदने के बाद कई वर्षों तक इस्तेमाल नहीं किया गया और इन्हें केवल हमले के दौरान सक्रिय किया गया था। इस खुलासे के बाद एक बार फिर सीमा पार से आतंकवाद को मिलने वाली कथित सहायता पर सवाल उठने लगे हैं।

जांच में सामने आया बड़ा डिजिटल सबूत

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की तकनीकी जांच की गई। जांच के दौरान मोबाइल उपकरणों की खरीद, निर्माण और उपयोग से जुड़ी जानकारियां जुटाई गईं। डिजिटल विश्लेषण में सामने आया कि दोनों मोबाइल फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे और इनकी गतिविधियां बेहद संदिग्ध थीं। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल सामान्य संचार उपकरण नहीं थे, बल्कि इन्हें किसी विशेष योजना के तहत उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया था। अब इनसे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पूरे आतंकी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

चार वर्षों तक बंद रहा एक मोबाइल फोन

जांच रिपोर्ट के अनुसार एक मोबाइल फोन वर्ष 2021 में खरीदा गया था, जबकि दूसरा वर्ष 2023 में लिया गया था। दोनों मोबाइल फोन खरीदने के बाद लंबे समय तक पूरी तरह निष्क्रिय रहे। इनमें न तो सामान्य बातचीत का कोई रिकॉर्ड मिला और न ही नियमित उपयोग के संकेत मिले। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इन्हें विशेष अभियान के लिए सुरक्षित रखा गया था। पहलगाम हमले के दौरान पहली बार इन मोबाइल उपकरणों को सक्रिय किया गया, जिससे उनकी भूमिका और भी संदिग्ध हो गई है।

कराची और लाहौर से जुड़े खरीद के दस्तावेज

जांच के दौरान मिले दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि एक मोबाइल फोन कराची स्थित एक कंपनी द्वारा आयात किया गया था। इस उपकरण की खरीद से जुड़े भुगतान रिकॉर्ड में पाकिस्तान के एक प्रमुख बैंक का नाम भी सामने आया है। वहीं दूसरा मोबाइल फोन लाहौर की एक संचार कंपनी द्वारा खरीदा गया था। जांच एजेंसियां अब इन दोनों खरीद प्रक्रियाओं से जुड़े सभी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे आतंकियों तक उपकरण पहुंचने की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सकता है।

मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों से मिले थे फोन

जांच एजेंसियों के अनुसार ये दोनों मोबाइल फोन उन आतंकियों के पास से बरामद किए गए थे जिन्हें सुरक्षा बलों ने एक बड़े अभियान के दौरान मार गिराया था। पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकवादी बाद में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में ढेर कर दिए गए थे। मुठभेड़ के बाद जब उनके पास मौजूद सामान की जांच की गई तो ये मोबाइल फोन बरामद हुए। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में इन्हीं उपकरणों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं।

पहलगाम हमला देश के इतिहास की दर्दनाक घटनाओं में शामिल

बाईस अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में आतंकियों ने निर्दोष लोगों को निशाना बनाया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आतंकियों ने लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें निशाना बनाया था। इस घटना ने कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद के खतरे को लेकर नई बहस छेड़ दी थी।

आतंकवादी नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश

सुरक्षा एजेंसियां अब केवल हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हैं। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आतंकियों को हथियार, संचार उपकरण और अन्य संसाधन कहां से प्राप्त हुए। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि हमले की योजना किस स्तर पर बनाई गई थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्य इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

डिजिटल तकनीक बन रही जांच का सबसे बड़ा हथियार

आधुनिक दौर में मोबाइल फोन किसी भी जांच का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। मोबाइल उपकरणों में मौजूद संपर्क सूची, संदेश, स्थान संबंधी जानकारी और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड किसी भी साजिश की परतें खोल सकते हैं। पहलगाम मामले में भी सुरक्षा एजेंसियां इन्हीं डिजिटल आंकड़ों के आधार पर आतंकियों के संपर्कों और गतिविधियों का पता लगाने में जुटी हैं। माना जा रहा है कि आगे की जांच में और भी कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई चौकसी

इस खुलासे के बाद जम्मू-कश्मीर सहित देश के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि आतंकवादी संगठन नई रणनीतियों के साथ सक्रिय होने की कोशिश कर सकते हैं। इसी कारण तकनीकी निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।

आवाद के खिलाफ जारी रहेगा अभियानतंक

पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। सुरक्षा एजेंसियां आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से लगातार अभियान चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

जांच से और बड़े खुलासों की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल फोन से जुड़े इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों को कई नई जानकारियां मिल सकती हैं। डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्क सूत्रों और वित्तीय लेनदेन की जांच से आतंकी नेटवर्क की पूरी संरचना सामने आने की संभावना है। फिलहाल एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।