पेपर लीक पर बड़ा एक्शन! परीक्षा संशोधन कानून लागू
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लोक परीक्षा संशोधन अधिनियम 2026 कानून बन गया है। नए कानून में पेपर लीक, नकल और परीक्षा धांधली पर कठोर सजा, भारी जुर्माना और त्वरित न्याय का प्रावधान किया गया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 01 अगस्त 2026
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है। नए कानून में पेपर लीक, संगठित नकल, तकनीकी छेड़छाड़ और परीक्षा धांधली से जुड़े अपराधों के लिए कठोर सजा, भारी जुर्माना और त्वरित न्याय की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना परीक्षा संशोधन अधिनियम
देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है।सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत बनाना है। लंबे समय से पेपर लीक और नकल की घटनाओं से छात्रों का भरोसा प्रभावित हो रहा था, जिसे बहाल करने के लिए यह कानून लाया गया है।
पेपर लीक और नकल माफिया पर कसेगा शिकंजा
नए कानून का सबसे बड़ा उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में सक्रिय पेपर लीक गिरोहों और संगठित नकल कराने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करना है। कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ करने और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।सरकार का मानना है कि पिछले कई वर्षों में परीक्षा माफियाओं ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। अब ऐसे तत्वों को कानून के दायरे में लाकर कठोर दंड देने का प्रावधान किया गया है ताकि भविष्य में कोई भी परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास न कर सके।
बड़ी भर्ती परीक्षाएं भी आएंगी कानून के दायरे में
संशोधित कानून के तहत देश की सभी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं को शामिल किया गया है। इनमें संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाएं शामिल हैं।सरकार का कहना है कि अब किसी भी बड़ी भर्ती परीक्षा में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
प्रधानमंत्री ने बताया ऐतिहासिक कदम
विधेयक के कानून बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य योग्यता आधारित और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली स्थापित करना है, जहां मेहनत करने वाले छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पेपर लीक माफिया और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले लोगों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं से किया गया वादा पूरा किया है और परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य जारी रहेगा।
परीक्षा अपराधों पर होगी कठोर सजा
नए कानून में परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। अनुचित साधनों का उपयोग करने या परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की सजा दी जा सकती है।इसके अलावा जुर्माने की राशि भी कई गुना बढ़ा दी गई है। व्यक्तिगत अपराधों में भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा, जबकि संगठित अपराधों में और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि कड़े दंड से परीक्षा अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
संगठित गिरोहों पर भारी जुर्माना
कानून में संगठित अपराधों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई गिरोह या संस्था परीक्षा में धांधली करने, प्रश्नपत्र लीक कराने या तकनीकी छेड़छाड़ में शामिल पाई जाती है तो उस पर करोड़ों रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।साथ ही दोषी पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं और एजेंसियों को कई वर्षों तक सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े कार्यों से प्रतिबंधित भी किया जा सकेगा। इससे परीक्षा प्रक्रिया में शामिल संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी।
दो महीने में जांच और तीन महीने में फैसला
सरकार ने कानून में त्वरित न्याय व्यवस्था को भी विशेष महत्व दिया है। परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए विशेष कार्यबल गठित किए जाएंगे, जो निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी करेंगे।आरोपपत्र दाखिल होने के बाद विशेष त्वरित न्यायालयों में प्रतिदिन सुनवाई होगी और मामलों का शीघ्र निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों पर रोक लगेगी और दोषियों को जल्दी सजा मिल सकेगी।
हर प्रकार की परीक्षा धांधली होगी अपराध
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कानून केवल प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में उत्तर कुंजी लीक करना, फर्जी प्रवेश पत्र बनाना, कंप्यूटर प्रणाली में छेड़छाड़ करना, परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करना और संगठित नकल कराना जैसे सभी अपराध शामिल किए गए हैं।उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के साथ परीक्षा अपराधों के तरीके भी बदल रहे हैं। इसलिए कानून को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप बनाया गया है ताकि किसी भी प्रकार की धांधली को रोका जा सके।
तकनीक के जरिए होगी परीक्षा व्यवस्था मजबूत
सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार भी लागू किए हैं। इनमें जैविक पहचान आधारित सत्यापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पहचान प्रणाली, निगरानी कैमरे, संकेत अवरोधक उपकरण और साइबर सुरक्षा तंत्र शामिल हैं।सरकार का दावा है कि इन उपायों से परीक्षा केंद्रों पर होने वाली अनियमितताओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा। साथ ही शिकायत निवारण व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि छात्रों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
मुख्य बिंदु
- परीक्षा संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
- पेपर लीक और नकल रोकने के लिए नया कानून लागू।
- प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली पर कठोर कार्रवाई होगी।
- पांच से दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान।
- भारी आर्थिक दंड और करोड़ों रुपये तक जुर्माना।
- त्वरित जांच और विशेष न्यायालयों में सुनवाई।
- संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की परीक्षाएं भी दायरे में।
- तकनीक आधारित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ावा।